
धनबाद : धनबाद में एक बेटे ने अपनी मां से मिलने के लिए प्रशासन से मदद मांगी. वे अपनी मां से 20 साल पहले बिछड़ गया था. कभी एक मां की गोद में सिर रखकर सोने वाला बेटा, जिसे कभी मां के आने की आस नहीं टूटी, अब वह आस और उम्मीद हकीकत बनने वाली है. 20 साल पहले जो मां अचानक उससे बिछड़ गई थी, वह आज जिंदा है लेकिन अपनों से दूर एक आश्रय गृह में.
बेटे को अपनी मां का इंतजार
सबसे बड़ा दर्द यह है कि जिस पति के साथ उसने जीवन बिताया, उसने उसे अपनाने से इनकार कर दिया, क्योंकि अब उसकी नई दुनिया बस चुकी है. लेकिन एक बेटा है, जिसकी यादों में मां आज भी जिंदा है, जिसकी आंखों में आज भी इंतजार है और जिसके दिल में बस एक ही ख्वाहिश ‘मां’ वापस आ जाए. यह कहानी सिर्फ रिश्तों के टूटने की नहीं, बल्कि ममता के उस अटूट बंधन की है, जो समय और परिस्थितियों से भी नहीं टूटता.
महिला 20 साल पहले हुई थी लापता
पूर्वी टुंडी प्रखंड के चुरूरिया पंचायत स्थित कांशीटांड़ आदिवासी टोला की रहने वाली कबली देवी दो दशक पहले अचानक लापता हो गई थीं. लंबे समय तक कोई सुराग नहीं मिला तो पति राजू मुर्मू उर्फ बुधु मुर्मू ने उन्हें मृत मान लिया और दूसरी शादी कर अपना घर बसा लिया.
वक्त बीतता गया, लेकिन हाल ही में एक ऐसी खबर आई जिसने सबको चौंका दिया. पता चला कि कबली देवी केरल के एक सरकारी आश्रय गृह में सुरक्षित हैं. जहां वे पिछले कई वर्षों से रह रही हैं. सूचना मिलते ही उम्मीद जगी कि अब बिछड़ा परिवार फिर से एक हो सकेगा. लेकिन कहानी ने नया मोड़ तब लिया, जब पति ने उन्हें अपनाने से साफ इनकार कर दिया. वह बीते रिश्ते को फिर से स्वीकार करने को तैयार नहीं है.
इसी बीच इस कहानी में उम्मीद की सबसे मजबूत किरण बनकर सामने आया उनका बेटा समर मुर्मू. बचपन में मां का साया खो देने वाला यह बेटा आज जवान हो चुका है, लेकिन उसकी भावनाएं अब भी वैसी ही हैं. मां के लिए उसके दिल में न कोई शिकायत है, न कोई दूरी बस मिलने की एक गहरी चाहत है.
बेटे की गुहार पर प्रशासन ने शुरू की पहल
समर का कहना है कि अगर पिता ने दरवाजा बंद कर दिया है, तो वह अपनी मां के लिए नया दरवाजा खोलेगा. उसने प्रशासन से अपील की है कि उसकी मां को वापस लाया जाए वह खुद उन्हें अपने साथ रखेगा, उनकी सेवा करेगा और उन्हें वह प्यार देगा, जिसकी कमी उन्होंने वर्षों तक महसूस की.
प्रशासन ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है और मां-बेटे को मिलाने की दिशा में पहल शुरू कर दी है. अब यह कहानी एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां एक तरफ बीते रिश्तों की दूरी है, तो दूसरी तरफ बेटे की अटूट ममता है. अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या यह बेटा आखिरकार अपनी मां को वापस घर ला पाएगा.

