डी ए वी नंदराज पब्लिक स्कूल बरियातू में सी बी एस ई द्वारा निर्धारित आठ घंटे का छात्रों के बीच मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देना इस विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।इस कार्यशाला में आर्य ज्ञान प्रचार समिति ग्रुप के डी ए वी नंदराज पब्लिक स्कूल, बुटी मोड़, डी ए वी नंदराज मोडर्न स्कूल लालपुर तथा नारायण दास ग्रोवर डीएवी पब्लिक स्कूल, बुंडू के लगभग 180 शिक्षकों ने भाग लिया।
सर्वप्रथम डॉ रविप्रकाश तिवारी, प्राचार्य डीएवी नंदराज पब्लिक स्कूल बरियातू, श्री दीपक कुमार , प्राचार्य, एन डी ग्रोवर डीएवी पब्लिक स्कूल, बुंडू, श्रीमती झूंपा सिंह, हेडमिस्ट्रेस, डी ए वी नंदराज मोडर्न स्कूल, लालपुर, श्रीमती मोनिका पाठक और श्रीमती शिल्पी गुप्ता ने दीपक जलाकर वेद मंत्रों के साथ कार्यशाला आरंभ किया।
अब कार्यशाला के प्रथम सत्र में डॉ रविप्रकाश तिवारी ने कहा कि 17 वीं शताब्दी बुद्धि, प्रकाश और उपदेश का, 18 वीं शताब्दी तर्क और विवेक का, 19 वीं शताब्दी प्रगतिकाल का और 20 वीं शताब्दी चिन्ताओं का युग है। शिक्षक हो या बच्चे, समाज का सामान्य नागरिक हो या विशेष सभी चिंता मग्न हैं। यही कारण है कि सी बी एस ई यह चाहती है कि हमारे बच्चे इस मानसिक स्वास्थ्य के बारे में ठीक से समझें और इसके प्रति जागरूक रहें। आयुर्वेद में स्वास्थ्य का अर्थ अपने आप में संतुलित होना है चाहे वह शारीरिक, मानसिक और सामाजिक ही क्यों न हो ?
भावनात्मक रूप से फीट रहना, मनोवैज्ञानिक रूप से एलर्ट यानी सजग रहना और सामाजिक रूप से प्रोडक्टिव यानी उद्योगशील रहना ही मेंटल हेल्थ है। पहले कहा जाता था कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क, संरचनात्मक विचारों का निवास होता है । यह सही था। समस्या बाहरी हो तो डॉक्टर आदि द्वारा इलाज संभव है परन्तु यदि सोच स्वयं की हो और आंतरिक हो तो समाधान भी स्वयं खोजना होगा। यह याद रखना चाहिए कि नियत नियती का निर्धारण करता है अतः हम अपना नियत ठीक रखें। हम प्रायः भूतकाल में जीते हैं जो बित गया उसका शोक मनाते हैं या फिर भविष्य में कि ऐसा होगा तो क्या होगा? इससे वर्तमान खराब कर लेते हैं। जीवन एक क्रिकेट की तरह है ।आते हुए बाॅल को देखने की आदत डालनी चाहिए। परसों किसी ने अपशब्द कहे,हम आज भी उसी में जी रहे हैं, क्यों कहा मुझे, यह सोचकर । जो अपने अधिकार में नहीं है उसमें समय नहीं लगाएं। योग, प्राणायाम, सत्संगति अच्छी पुस्तकों को पढ़ना इसमें समय बिताएं। संतोष रखें यही सब उपाय स्वस्थ रहने के हैं।
इस अवसर पर बुंडू के प्राचार्य श्री दीपक कुमार जी ने भी शिक्षकों से अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किए साथ ही श्रीमती झूंपा सिंह जी ने भी शिक्षिकाओं और विद्यालयीय बच्चियों को सजग रहने का आह्वान किया।

इसी क्रम में रिसोर्स पर्सन श्रीमती मोनिका पाठक ने कहा कि जब माता – पिता और शिक्षक बच्चों में सामाजिक, स्वाभाविक परंपराओं से हटकर उनके खाने- पीने, निराशा की भावना, भ्रमित होना, बार बार क्रोध करना, मूड में बदलाव,
अकेलापन महसूस करना आदि देखें तो यही डिप्रेशन के लक्षण है समझ जाना चाहिए और उसके लिए उस छात्र – छात्रा की बातों को सुनना, थोड़ा रूककर बात करना, छोटी छोटी कहानियों द्वारा समाधान बताना, धैर्य, योग , प्राणायाम, कर्मफल के सिद्धांत बताना , अपनत्व दिखलाना और अंत में डाक्टरी सलाह लेना आदि उपाय किया जाना चाहिए। इसी तरह दूसरी रिसोर्स पर्सन श्रीमती शिल्पी गुप्ता ने बताया कि स्वस्थ जीवनशैली, संवाद, मदद मांगना, सकारात्मक रहना, अपनों से जुड़े रहना, पर्याप्त नींद लेना , सक्रिय रहना आदि उपायों के द्वारा मेंटल हेल्थ को ठीक किया जाना चाहिए न कि उपेक्षा, क्रोध ,दंड आदि के द्वारा।
अंत में श्रीमती मोनिका पाठक ने धन्यवाद ज्ञापित किया। मधुर संगीत और शांति पाठ के साथ कार्यशाला समाप्त हो गया।

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