
रांची। झारखंड में संचालित कुल 1343 दुकानों में से 1302 के लिए दुकान संचालकों ने लाइसेंस शुल्क जमा कर दिया है। सिर्फ 41 ऐसी दुकानें हैं, जिनके संचालन में दुकानदारों ने रूचि नहीं दिखाई और उनके लिए लाइसेंस शुल्क जमा नहीं किया। यानी, एक तरह से ये दुकानें आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में एक अप्रैल से सरेंडर मानी इन 41 दुकानों के निबंधन के लिए फिर से लॉटरी की प्रक्रिया शुरू होगी। उनका आवंटन नहीं होने पर झारखंड राज्य बेवरेजेज कारपोरेशन लिमिटेड उन दुकानों का संचालन स्वयं करेगा।
लाइसेंस शुल्क जमा करने वाले दुकानदारों को सात मार्च तक साढ़े बारह प्रतिशत मार्जिन मनी जमा करने का निर्देश दिया गया है। सात मार्च तक मार्जिन मनी जमा नहीं करने वालों की दुकानें भी लाइसेंस शुल्क जमा करने के बावजूद सरेंडर हो जाएंगी।
उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए शराब दुकानों के नवीनीकरण को लेकर लाइसेंस शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि सात फरवरी रखी थी। इसमें नगर निगम क्षेत्र की दुकानों के लिए दो लाख रुपये व ग्रामीण क्षेत्र की दुकानों के लिए एक लाख रुपये रखा गया था। यह राशि नन रिफंडेबल है।
इसका मतलब यह हुआ कि जिन दुकानों का लाइसेंस शुल्क जमा होगा, उन्हें ही अगले वित्तीय वर्ष के लिए नियमित माना जाएगा, जो नहीं देंगे, वह सरेंडर माने जाएंगे। इस नियम के तहत ही कुल 1302 दुकानदारों ने लाइसेंस शुल्क जमा किया, यानी वे अगले वित्तीय वर्ष में भी उन दुकानों के संचालित करने के लिए तैयार हैं।
[राज्य में कुल 1343 दुकानों में देसी शराब की 159 व कंपोजिट शराब की 1184 दुकानें स्वीकृत हैं। वर्तमान में सभी दुकानें निजी हाथों से संचालित हो रही हैं।
होली में शराब व गर्मी में बीयर की बिक्री के मद्देनजर दुकानदारों ने जुटाई हिम्मत
शराब दुकानदार संघ का कहना है कि वर्तमान में जिस अनुपात में कर का भुगतान करना पड़ रहा है, उस अनुरूप शराब की बिक्री नहीं है। यही वजह है कि इस बार ज्यादा दुकानें सरेंडर होनी थी। इसी बीच दुकानदारों ने आने वाले होली व गर्मी में शराब व बीयर की बिक्री को देखते हुए यह हिम्मत जुटाई है कि उन्हें आने वाले कुछ महीने में अच्छी कमाई होगी।
इसी के मद्देनजर उन दुकानदारों ने लाइसेंस शुल्क जमा कर अपनी दुकानों के नवीनीकरण के लिए आगे का प्रयास किया है। होली के ठीक बाद सात मार्च तक आगामी वित्तीय वर्ष के लिए साढ़े बारह प्रतिशत मार्जिन मनी जमा करना है।
होली में अच्छी कमाई नहीं होने पर ये दुकानदार उस समय भी पीछे हट सकते हैं, ऐसे में सरेंडर दुकानों की संख्या बढ़ सकती है। मार्जिन मनी जमा नहीं करने वाले दुकानदारों का लाइसेंस शुल्क जब्त हो जाएगा, मतलब उन्हें उस राशि से हाथ धोना पड़ेगा।

