
रांची: चाईबासा के सारंडा जगंल में हुए पुलिस मुठभेड़ में कुख्यात नक्सली अनल दा मारा गया. अनल दा पर एक करोड़ का इनाम घोषित था. गिरिडीह का रहने वाला अनल दा उर्फ तूफान उर्फ पतिराम मांझी उर्फ पतिराम मरांडी उर्फ रमेश भाकपा माओवादी के केंद्रीय कमेटी का प्रमुख सदस्य था. माओवादी संगठन में रणनीतिकार के रूप में जाना जाने वाला यह नक्सली लंबे समय से सुरक्षाबलों के रडार पर था. गिरिडीह के पीरटांड़ थाना क्षेत्र का अनल 1987 से सक्रिय था और झारखंड-बिहार के कई जिलों में अपना आतंक कायम कर चुका था.
पीरटांड़-टुंडी-तोपचांद इलाके में गोपाल दा के नाम से दहशत
1987 से 2000 तक अनल दा ने पीरटांड़, टुंडी और तोपचांद इलाके में गोपाल दा के नाम से अपना सिक्का जमाया. इस दौरान नक्सली संगठन ने इस क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ बनाई. अनल दा ने संगठन की रणनीतियों को लागू कर कई हमलों का नेतृत्व किया, जिससे स्थानीय स्तर पर पुलिस और ग्रामीणों में दहशत फैल गई. यही वह दौर था जब नक्सलवाद झारखंड के इस हिस्से में चरम पर पहुंचा.
जमुई में गिरफ्तारी और गिरिडीह जेल का सफर
साल 2000 के आसपास अनल दा को जमुई (बिहार) भेज दिया गया. वहां वह एक बार गिरफ्तार हुआ. गिरफ्तारी के बाद उसे गिरिडीह जेल स्थानांतरित किया गया. जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद अनल दा ने अपनी गतिविधियां फिर शुरू कर दीं. इस दौरान उसका संगठन में प्रभाव तेजी से बढ़ा.
रांची-गुमला की कमान और केंद्रीय कमेटी में प्रमोशन
जमानत के बाद अनल दा ने रांची और गुमला जिलों की कमान संभाली. यहां उसने माओवादी संगठन को नई दिशा दी. उसके रणनीतिक कौशल के कारण भाकपा माओवादी की केंद्रीय कमेटी में शामिल किया गया. विशेषज्ञों का मानना है कि अनल दा संगठन के प्रमुख फैसले लेने वालों में शुमार था

