चांथाबुरी (थाईलैंड): दक्षिण-पूर्वी एशिया के दो पड़ोसी देशों ― थाईलैंड और कंबोडिया ― के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद में आखिरकार सुलह की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा है। शनिवार को थाईलैंड के रक्षा मंत्री नत्थापोन नाकपानिच और कंबोडिया के उप प्रधानमंत्री व रक्षा मंत्री टी सिया ने चांथाबुरी प्रांत में स्थित एक बॉर्डर चेकपॉइंट पर युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर किए।
सीजफायर बातचीत और आसियान की भूमिका
शिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यह समझौता तीसरी स्पेशल कंबोडिया-थाईलैंड जनरल बॉर्डर कमेटी की मीटिंग के बाद हुआ, जिसमें आसियान देशों के ऑब्जर्वर भी शामिल थे। सीजफायर वार्ता स्थानीय समय के अनुसार सुबह करीब 9.40 बजे शुरू हुई। दोनों देशों के सैन्य प्रतिनिधियों ने सीमा पर गोलीबारी रोकने, सैनिकों की तैनाती सीमित करने और खुफिया समन्वय बढ़ाने पर सहमति जताई।
जुलाई के बाद बढ़ा था तनाव
जुलाई में सीजफायर टूटने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था। 8-9 दिसंबर को सीमा पर हिंसा छिड़ी, जिसमें थाई फाइटर जेट्स और तोपों ने हमला किया, जबकि कंबोडिया ने रॉकेट से जवाबी कार्रवाई की थी। झड़पें डांगरेक पर्वत श्रृंखला के पास केंद्रित रहीं, जो सदियों पुराने मंदिरों और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए प्रसिद्ध है।
प्रेह विहार मंदिर विवाद की जड़
इस विवाद की जड़ प्रेह विहार मंदिर से जुड़ी है। 1962 में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने मंदिर पर कंबोडिया का अधिकार तो माना, लेकिन उसके आसपास की जमीन पर स्थिति स्पष्ट नहीं की। इसी अस्पष्टता ने दशकों से चल रहे इस सीमा विवाद को जिंदा रखा है। अब दोनों देशों की सरकारों का कहना है कि यह समझौता स्थायी शांति की ओर एक “कूटनीतिक जीत” है। आसियान देशों ने उम्मीद जताई कि यह फैसला क्षेत्र में स्थिरता बहाल करेगा और भविष्य में भरोसे का पुल बनेगा।


