हजारीबाग: झारखंड की सबसे अभेद्य मानी जाने वाली लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा (जेपी कारा) की सुरक्षा व्यवस्था उस वक्त ताश के पत्तों की तरह ढह गई, जब बैरक नंबर 6 की खिड़की काटकर तीन सजायाफ्ता कैदी फरार हो गए। घटना को हुए 24 घंटे से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन पुलिस के हाथ अब तक अंधेरे में ही हाथ-पांव मार रहे हैं। इस बड़ी चूक ने न केवल जेल प्रशासन पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पूरे राज्य की सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है।
साजिश का ‘टाइम-लाइन’: 69 मिनट में सुरक्षा ध्वस्त
सीसीटीवी फुटेज की जांच में जो सच्चाई सामने आई है, वह रोंगटे खड़े करने वाली है। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बीच रात लगभग 1:36 बजे कैदियों ने बैरक नंबर 6 की खिड़की नंबर 4 का ग्रिल काटना शुरू किया और 2:45 बजे तक वे जेल की दीवारें लांघ चुके थे। महज 69 मिनट के भीतर कैदियों ने इस दुस्साहसिक वारदात को अंजाम दिया। बताया जा रहा है कि उस रात बिजली गुल होने और घने कोहरे का फायदा उठाते हुए कैदी जेल के प्रहरियों की नजरों से बच निकले।
जेल अधीक्षक चंद्रशेखर प्रसाद सुमन ने इस घोर लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए दो हेड वार्डन—हरेंद्र महतो और उमेश सिंह—को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। ये दोनों उसी वार्ड की सुरक्षा में तैनात थे। इसके अलावा, ड्यूटी पर तैनात अन्य 18 जेलकर्मियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। मामले को लेकर लोहसिंघना थाना में कांड संख्या 196/2025 दर्ज की गई है।
कौन हैं ये फरार ‘खलनायक’?
फरार कैदियों में सबसे बड़ा सिरदर्द देवा भुइयां है। देवा कोई साधारण अपराधी नहीं है; यह उसका दूसरा ‘जेल ब्रेक’ है। इससे पहले वह 2021 में धनबाद जेल से भी फरार हो चुका था। उसके साथ पोक्सो एक्ट में 22 साल की सजा काट रहा जीतेंद्र रवानी और उम्रकैद की सजा झेल रहा राहुल रजवार भी भागने में सफल रहे।
बिहार तक बिछा पुलिस का जाल
हजारीबाग एसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी (SIT) का गठन किया है। पुलिस की पांच टीमें रांची, धनबाद और पड़ोसी राज्य बिहार के विभिन्न ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही हैं। फोरेंसिक एक्सपर्ट्स जेल के भीतर से साक्ष्य जुटा रहे हैं और कॉल डंप डेटा के जरिए बाहरी मददगारों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों का दावा है कि घेराबंदी सख्त है और जल्द ही तीनों सलाखों के पीछे होंगे।


