मॉस्को। मास्को और मिन्स्क के फैसलों ने यूरोप की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी है। बेलारूस अब केवल रूस का सहयोगी नहीं रह गया, बल्कि पश्चिमी देशों के लिए एक रणनीतिक लॉन्चपैड बनता नजर आ रहा है। बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने ऐलान किया है कि रूस की अत्याधुनिक ‘ओरेश्निक’ हाइपरसोनिक मिसाइल प्रणाली जिसे मौत की मशीन कहा जाता है, को देश में तैनात कर दिया गया है। इस घोषणा के बाद नाटो देशों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि यह मिसाइल यूरोप के बड़े हिस्से को अपनी जद में लेने में सक्षम मानी जा रही है।

रूस की सैन्य कमान पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि हाइपरसोनिक मिसाइलों से लैस एक पूरी सैन्य ब्रिगेड तैयार कर ली गई है। नवंबर 2024 में यूक्रेन पर इसके सीमित इस्तेमाल ने इसकी ताकत की झलक दुनिया को दिखा दी थी। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का दावा है कि भले ही इसमें परमाणु वारहेड न हो, फिर भी इसकी मारक क्षमता परमाणु हथियारों जैसी तबाही मचाने में सक्षम है। इसकी गति और दिशा बदलने की क्षमता इसे मौजूदा वायु रक्षा प्रणालियों के लिए लगभग अजेय बना देती है। इस बढ़ते सैन्य दबाव के बीच यूक्रेन की स्थिति भी कमजोर होती दिख रही है। राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने संकेत दिए हैं कि देश के पास सीमित समय तक ही युद्ध जारी रखने के संसाधन बचे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर जल्द वित्तीय मदद नहीं मिली तो ड्रोन उत्पादन जैसे अहम रक्षा कार्यक्रमों में कटौती करनी पड़ सकती है। यूक्रेन की नजर रूस की उन अरबों यूरो की संपत्तियों पर है, जो यूरोप में फ्रीज की गई हैं, लेकिन इस मुद्दे ने रूस और यूरोपीय देशों के बीच टकराव और बढ़ा दिया है।

रूस ने साफ कर दिया है कि उसकी जमी संपत्तियों को यूक्रेन को देने की किसी भी कोशिश के गंभीर नतीजे होंगे। इस चेतावनी के बाद यूरोप के भीतर भी असमंजस की स्थिति है। एक तरफ यूक्रेन का समर्थन करने का दबाव है, तो दूसरी तरफ रूस के साथ सीधे टकराव का खतरा मंडरा रहा है।इसी तनावपूर्ण माहौल में अमेरिका भी कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय नजर आ रहा है। पर्दे के पीछे चल रही संभावित बातचीत से यह संकेत मिल रहा है कि युद्ध को खत्म करने के रास्ते तलाशे जा रहे हैं, हालांकि जमीन पर हालात लगातार और खतरनाक होते जा रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच बेलारूस खुद को एक ऊर्जा-सुरक्षित देश के रूप में पेश कर रहा है। रूस की मदद से बने परमाणु ऊर्जा संयंत्र को भविष्य की गारंटी बताया जा रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि हाइपरसोनिक मिसाइलों की तैनाती ने यूरोप को एक ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां एक छोटी चूक भी बड़े युद्ध की वजह बन सकती है। महायुद्ध की आहट अब केवल चेतावनी नहीं, बल्कि एक वास्तविक आशंका बनती जा रही है।

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