रांची, दिनांक 02 मई 2026:
झारखंड राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड द्वारा अधिसूचित नवगठित पहाड़ी मंदिर प्रबंध समिति के पदाधिकारियों ने आज पहाड़ी मंदिर परिसर के समीप एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया। इस अवसर पर समिति के सचिव राकेश सिन्हा, सदस्य दीपक ओझा, राजेश साहू, अरुण वर्मा, मेहुल प्रसाद एवं बादल सिंह सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए सचिव राकेश सिन्हा ने हाल के दिनों में पूर्व प्रबंधन से जुड़े व्यक्तियों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों का क्रमवार खंडन करते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दों को सार्वजनिक किया। उन्होंने दिनांक 29-12-2024 के पत्र का उल्लेख करते हुए प्रश्न उठाया कि मंदिर परिसर में रखी करोड़ों रुपये मूल्य की लोहे एवं प्लास्टिक सामग्री को बिना किसी विधिवत निविदा प्रक्रिया एवं सरकारी मूल्यांकन के किस आधार पर विक्रय किया गया। उन्होंने इसे गंभीर अनियमितता तथा संभावित भ्रष्टाचार का मामला बताया।

सिन्हा ने स्पष्ट किया कि झारखंड राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत नई समिति का गठन किया गया है। उन्होंने बताया कि न्यायालय के निर्देशानुसार पूर्व समिति को पर्याप्त अवसर प्रदान किया गया था। इस संदर्भ में 09 जनवरी 2026 एवं 10 अप्रैल 2026 को नोटिस जारी कर आवश्यक स्पष्टीकरण मांगा गया, किन्तु संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं हुआ। फलस्वरूप, 23 अप्रैल 2026 को आयोजित बोर्ड बैठक में प्रासंगिक धाराओं (धारा 29, 32 एवं अन्य) के अंतर्गत नई प्रबंध समिति का गठन किया गया।

उन्होंने यह भी अवगत कराया कि पूर्व में मंदिर कार्यालय का ताला तोड़कर महत्वपूर्ण दस्तावेजों के कथित रूप से ले जाए जाने एवं परिसर को क्षति पहुँचाने के संबंध में सुखदेवनगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है, जिसकी जांच वर्तमान में प्रचलित है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ तत्व सुनियोजित रूप से भ्रामक प्रचार कर रहे हैं, तथापि इससे समिति के कार्यों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने जानकारी दी कि समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एस.एन. पाठक दिनांक 04 मई 2026 को औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण करेंगे।

वहीं, समिति के सदस्य बादल सिंह ने बताया कि मंदिर के समग्र विकास एवं श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार हेतु राज्य सरकार से ₹6.74 करोड़ की राशि स्वीकृत कराने का प्रयास किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ व्यक्तियों द्वारा ठेकेदारी प्रक्रियाओं में अनावश्यक हस्तक्षेप कर योजनाओं में परिवर्तन किया जा रहा है, जिससे कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है तथा वित्तीय अनियमितताओं की आशंका उत्पन्न हो रही है।

समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका मुख्य उद्देश्य मंदिर प्रबंधन में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करना तथा सभी श्रद्धालुओं को बिना किसी भेदभाव के समान रूप से पूजा-अर्चना का अवसर प्रदान करना है। इसके अंतर्गत मंदिर परिसर में तथाकथित ‘वीआईपी संस्कृति’ को समाप्त कर समान व्यवस्था लागू की जाएगी।

कार्यक्रम के अंत में वर्तमान एवं पूर्व प्रबंधन से सहयोग की अपील की गई, ताकि मंदिर के विकास एवं व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सके।

इस अवसर पर अजय सिंह, रिवाल्डो वर्मा, अमन सिंह सहित अनेक शिवभक्त उपस्थित रहे।

जारीकर्ता:
राकेश सिन्हा
सचिव, पहाड़ी मंदिर विकास समिति
सदस्य, झारखंड राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड

बादल सिंह

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