रांची: झारखंड की माटी से एक बार फिर ऐसी प्रतिभा निकली है जिसने पूरी दुनिया में राज्य का मान बढ़ा दिया है। रांची के ओरमांझी प्रखंड स्थित मुंडा टोली की रहने वाली 14 वर्षीया अनुष्का को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ से सम्मानित किया है। यह सम्मान केवल अनुष्का की प्रतिभा का नहीं, बल्कि उस अटूट हौसले का है जिसने गरीबी, अभाव और पिता की बीमारी जैसी चुनौतियों को हराकर फुटबॉल के मैदान पर सफलता की नई इबादत लिखी है।
अनुष्का की सफलता के पीछे का संघर्ष रूह कंपा देने वाला है। एक छोटे से मिट्टी के घर में रहने वाली अनुष्का के पिता दिलेश मुंडा गंभीर बीमारी के कारण बिस्तर पर हैं। घर का पूरा बोझ मां के कंधों पर है, जो दिनभर खेतों में पसीना बहाने के बाद सब्जी बेचकर परिवार का पेट पालती हैं। इन मुश्किल हालात के बीच अनुष्का ने 11 साल की उम्र में हजारीबाग के रेजिडेंशियल गर्ल्स फुटबॉल ट्रेनिंग सेंटर का रास्ता चुना। मां की आंखों में आंसू थे, लेकिन कलेजे में बेटी के लिए बड़ा सपना था।
मैदान पर अनुष्का की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भूटान में आयोजित सैफ अंडर-17 महिला फुटबॉल चैंपियनशिप में उन्होंने महज छह मैचों में आठ गोल दागकर तहलका मचा दिया था। वे उस टूर्नामेंट की टॉप स्कोरर रहीं। क्रिस्टियानो रोनाल्डो को अपना रोल मॉडल मानने वाली अनुष्का आज खुद कई लड़कियों के लिए प्रेरणा बन गई हैं। हजारीबाग के सेंटर में सुबह 4 बजे से शुरू होने वाला कड़ा अभ्यास और चोटों के बावजूद मैदान पर डटे रहने की जिद ने ही उन्हें आज देश के सर्वोच्च बाल पुरस्कार तक पहुंचाया है।
झारखंड की इस बेटी ने साबित कर दिया है कि अगर पैरों में दम और इरादों में जान हो, तो मंजिल खुद-ब-खुद कदम चूमती है। अनुष्का की यह उपलब्धि न केवल ओरमांझी बल्कि पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय है।


