बिहार के वैशाली जिले से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है, जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। यह मामला सिर्फ शादी या अलगाव का नहीं बल्कि रिश्तों की जटिल सच्चाई और व्यक्तिगत आजादी को उजागर करता है। यहां एक पति ने समाज की परंपराओं से अलग सोच दिखाई और अपनी पत्नी की कोर्ट मैरिज में खुद गवाह बनकर उसे सहारा दिया। यह घटना न सिर्फ इलाके में बल्कि सोशल मीडिया पर भी लोगों के लिए चर्चा का विषय बन गई।रानी कुमारी की शादी साल 2011 में अहिरपुर निवासी कुंदन कुमार से कोर्ट मैरिज के जरिए हुई थी। कुंदन घर पर ग्राहक सेवा केंद्र चलाकर परिवार का खर्च संभालते थे। समय के साथ परिवार बड़ा हुआ और दोनों तीन बच्चों के माता-पिता बने। कुछ साल पहले रानी की बातचीत सोशल मीडिया के जरिए अपने फुफेरे भाई गोबिंद कुमार से बढ़ने लगी। पहले हल्की-फुल्की बातें हुईं, फिर बातचीत भावनात्मक जुड़ाव में बदल गई। रानी को लगा कि गोबिंद उन्हें समझते हैं और इसी वजह से धीरे-धीरे रिश्ता गहरा हुआ।

इस दौरान रानी का व्यवहार बदलने लगा। कई बार उन्होंने पति और बच्चों को छोड़कर गोबिंद के पास रहने की कोशिश की। दो-तीन साल पहले अचानक वह घर से चली गईं, लेकिन बाद में वापस लाईं गईं। कुंदन के जम्मू जाने के बाद भी रानी वहीं ठहरीं। लगातार ऐसी स्थिति से कुंदन भीतर से टूट गए और उन्होंने समझ लिया कि किसी को जबरदस्ती साथ नहीं रखा जा सकता।उन्होंने रानी से साफ कहा कि अगर वह गोबिंद के साथ रहना चाहती हैं तो वह रोक नहीं लगाएंगे। कुंदन ने खुद रानी और गोबिंद की कोर्ट मैरिज करवाई, और खुद गवाह बनकर वहां खड़े रहे। रानी ने कहा कि अब वह खुश हैं और मानसिक दबाव महसूस नहीं करतीं। उन्होंने साफ किया कि उनके तीनों बच्चे कुंदन के साथ ही रहेंगे, जबकि गोबिंद ने भरोसा जताया कि अब कोई छुपाव नहीं है और यह उनके जीवन की नई शुरुआत है। यह कहानी बताती है कि हर रिश्ता और हर फैसला अलग होता है। व्यक्तिगत भावनाओं, सहमति और समझदारी से लिए गए निर्णय समाज के लिए भी सोचने वाली मिसाल बन सकते हैं।

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