मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा और चौंकाने वाला घटनाक्रम देखने को मिला। मंत्री पद से इस्तीफा देने के ठीक 24 घंटे बाद ही एनसीपी (अजित पवार गुट) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री माणिकराव कोकाटे को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिल गई। अदालत ने 1995 के धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में सुनाई गई सजा को निलंबित करते हुए उन्हें जमानत दे दी।

यह फैसला ऐसे समय पर आया, जब निचली अदालतों से राहत न मिलने के कारण कोकाटे को मंत्री पद छोड़ना पड़ा था और उनकी गिरफ्तारी की आशंका भी बनी हुई थी। हाईकोर्ट के इस आदेश ने न केवल कोकाटे की मुश्किलें फिलहाल कम कर दीं, बल्कि राज्य की राजनीति में नई बहस को भी जन्म दे दिया।

यह मामला करीब तीन दशक पुराना है और लंबे समय से अदालतों में चल रहा था। फरवरी 2025 में नासिक की मजिस्ट्रेट अदालत ने कोकाटे को दोषी ठहराते हुए दो साल की सजा और जुर्माना लगाया था। इसके बाद कोकाटे ने सजा के खिलाफ अपील दायर की, लेकिन दिसंबर 2025 में नासिक की सेशंस कोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। इसके साथ ही उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो गया। सेशंस कोर्ट से झटका लगने के बाद राजनीतिक दबाव तेजी से बढ़ा। 17 दिसंबर 2025 को उनसे खेल, युवा कल्याण और अल्पसंख्यक विकास मंत्रालय का प्रभार छीन लिया गया। अगले ही दिन उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद कोकाटे ने सजा पर रोक और जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

19 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए सजा को सस्पेंड कर दिया और जमानत मंजूर कर ली। इसका सीधा मतलब यह है कि अपील पर अंतिम फैसला आने तक कोकाटे को जेल नहीं जाना होगा। साथ ही उनका विधायक पद भी फिलहाल सुरक्षित रह सकता है, क्योंकि सजा पर रोक लगने से कानूनी अड़चनें अस्थायी रूप से दूर हो गई हैं। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सत्ता से जुड़े नेताओं को आसानी से राहत मिल जाती है, जबकि आम लोगों को ऐसी राहत नहीं मिलती। वहीं सत्तारूढ़ खेमे के नेताओं का कहना है कि यह पूरी तरह न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है और अदालत के फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए।

फिलहाल यह राहत अस्थायी है। कोकाटे की अपील पर आगे भी सुनवाई होगी। अंतिम निर्णय आने के बाद ही यह साफ होगा कि उनकी सजा पूरी तरह रद्द होती है या नहीं और उनका राजनीतिक भविष्य किस दिशा में जाता है।

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