
रांची। राज्य में एक अप्रैल से सरेंडर होने जा रही शराब दुकानों के राजस्व का लोड शेष दुकानों पर नहीं पड़ेगा। उन दुकानों को फिर से लॉटरी के माध्यम से निबंधित करने की प्रक्रिया की जाएगी।
अगर उसके बाद भी अगर वे दुकानें नहीं निबंधित हुईं तो झारखंड राज्य बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड उन दुकानों का संचालन करेगा।
व्यवसायियों के विरोध के बाद इसे पेपर पर लाने की पहल की गई है। उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग नियमावली में संशोधन करने जा रहा है। संशोधित नियमावली पर कैबिनेट की स्वीकृति ली जाएगी।
झारखंड में एक सितंबर 2025 से निजी हाथों से शराब की बिक्री हो रही है। जिस नियमावली के तहत शराब की बिक्री शुरू हुई है, उसमें यह निहित था कि अगर किसी जिले में पांच प्रतिशत दुकानें नए वित्तीय वर्ष में सरेंडर होगी तो उन दुकानों को बंद करके उन दुकानों पर निर्धारित राजस्व लक्ष्य को उस जिले की शेष 95 प्रतिशत दुकानों पर बांट दिया जाएगा।
इतना ही नहीं, प्रत्येक वर्ष विभाग अपने राजस्व लक्ष्य में करीब दस प्रतिशत की वृद्धि करता है, जिसका भार अलग से बढ़ेगा।इन्हीं सभी विसंगतियों को देखते हुए संशोधित नियमावली तैयार हो रही है, ताकि व्यवसायियों के हित का ध्यान रखा जा सके।
[ संशोधित उत्पाद नियमावली और बार संचालन नियमावली को इसी माह दिया जाना है अंतिम रूप
संशोधित उत्पाद नियमावली व बार संचालन नियमावली को इसी माह अंतिम रूप दिया जाना है। इसे लेकर विभाग में अधिकारी तैयारी में जुटे हुए हैं।
बताया जा रहा है कि एक अप्रैल से इन दोनों ही नियमावली के तहत ही दुकानों, बार, होटल, रेस्टोरेंट, क्लब आदि में शराब बिकेगी।

