राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने दूरदर्शन, झारखण्ड द्वारा झारखण्ड राज्य के रजत वर्ष केअवसर पर “झारखंड के 25 सालः उपलब्धियां, चुनौतियां और आगे की राह” विषय पर आयोजित ‘डीडी संवाद’ के उदघाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड राज्य के रजत वर्ष के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम आत्ममंथन और भविष्य के लिए संकल्प का भी महत्वपूर्ण अवसर है।

राज्यपाल ने कहा कि 15 नवम्बर, 2000 को धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर झारखंड राज्य का गठन भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में जन-आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए किया गया। उन्होंने उल्लेख किया कि उस समय वे केंद्रीय मंत्रिपरिषद के सदस्य थे एवं लोकसभा सांसद के रूप में उन्हें झारखंड निर्माण के पक्ष में मतदान करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ राज्यपाल ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में झारखंड ने विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति की है और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, किन्तु कई क्षेत्रों में अभी और सक्रियता तथा निरंतर प्रयास अपेक्षित हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध एवं परिश्रमी तथा प्रतिभाशाली नागरिकों की भूमि के रूप में विख्यात यह प्रदेश ‘रत्नगर्भा’ की पहचान रखता है और देश की आर्थिक उन्नति में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पर्यटन के क्षेत्र में भी झारखंड में व्यापक संभावनाएँ विद्यमान हैं।

राज्यपाल ने कहा कि रजत वर्ष के इस अवसर पर उपलब्धियों के साथ-साथ चुनौतियों का निष्पक्ष मूल्यांकन आवश्यक है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, पोषण तथा युवाओं के लिए कौशल-आधारित रोजगार जैसे विषयों पर निरंतर और ठोस प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुँचे, यह शासन और समाज दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

कि झारखंड की युवा आबादी राज्य की सबसे बड़ी पूँजी है। युवाओं को ‘जॉब क्रिएटर’ बनने के लिए प्रेरित करना समय की आवश्यकता है तथा कौशल विकास, उद्यमिता और नवाचार को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि खेल के क्षेत्र में हॉकी, तीरंदाजी, क्रिकेट, एथलेटिक्स और फुटबॉल में झारखंड के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का गौरव बढ़ाया है। यह राज्य की समृद्ध प्रतिभा का प्रमाण है, जिसे समुचित संसाधन और प्रोत्साहन उपलब्ध कराना आवश्यक है।
कि रजत वर्ष हमें यह संदेश देता है कि हमारी मंज़िल अभी शेष है। उन्होंने सभी को मिलकर आने वाले वर्षों में झारखंड को विकसित, समावेशी और आत्मविश्वासी राज्य बनाने तथा विकसित भारत@2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

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