तेहरान। ईरान इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट और बढ़ती महंगाई से जूझ रहा है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों और लोगों के बीच हुई झड़पों में अब तक कम से कम 27 लोगों की मौत की खबर सामने आई है। इससे देशभर में तनाव और गहरा गया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में ईरान के इलम प्रांत के अबदानान शहर की तस्वीरें सामने आई हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। इनमें छोटे बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और पूरे परिवार शामिल हैं। लोग नारे लगाते हुए मार्च कर रहे हैं, वहीं ऊपर आसमान में हेलीकॉप्टर मंडराते नजर आ रहे हैं। खास बात यह रही कि कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों की संख्या वहां तैनात सुरक्षा बलों से कहीं ज्यादा दिखी।

नॉर्वे में स्थित एक मानवाधिकार संगठन के मुताबिक, सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कम से कम 27 प्रदर्शनकारियों की जान चली गई है। इनमें 18 साल से कम उम्र के पांच बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। यह जानकारी सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ गई है।

ईरानी सरकार ने भी माना है कि हिंसा में सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचा है। सरकारी मीडिया के अनुसार, हालिया झड़पों में एक पुलिसकर्मी की मौत हुई है। रिपोर्ट में बताया गया कि पहले मारे गए प्रदर्शनकारियों के अंतिम संस्कार के बाद हालात और बिगड़े, जिसके बाद एक पुलिसकर्मी को गोली मार दी गई। सरकार का दावा है कि अशांति के दौरान कम से कम तीन लोगों की मौत हुई है।

इन घटनाओं पर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने इस हफ्ते पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि उपद्रव फैलाने वालों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए। जिन इलाकों में 28 दिसंबर को सबसे पहले प्रदर्शन शुरू हुए थे, वहां अब भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। उस दिन दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर विरोध जताया था।

मंगलवार को राजधानी तेहरान के कई बड़े व्यापारिक इलाकों में भी विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और सरकार की नीतियों को लेकर आम लोगों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ रहा है।

इस बीच अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने ईरान में हो रही कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। संगठन का कहना है कि प्रदर्शनकारियों पर इस तरह की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है और यह दिखाता है कि सरकार विरोध को दबाने के लिए कितनी दूर तक जा सकती है।

विरोध प्रदर्शनों के बीच ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने भी लोगों से खुली अपील की है। उन्होंने कहा कि 8 और 9 जनवरी की रात ठीक 8 बजे लोग जहां हों, वहीं से नारे लगाएं। उन्होंने संकेत दिए कि लोगों की प्रतिक्रिया के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

मौजूदा हालात को ईरान में हाल के वर्षों का सबसे बड़ा आंदोलन माना जा रहा है। इससे पहले 2022 और 2023 में भी देशभर में बड़े प्रदर्शन हुए थे, जो एक युवती की हिरासत में मौत के बाद भड़के थे। अब एक बार फिर आर्थिक संकट ने ईरान को उबाल के कगार पर ला खड़ा किया है और पूरी दुनिया की नजरें वहां के हालात पर टिकी हैं।

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