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Home»Uncategorized»पाषाण से भगवान की अभिव्यक्ति ही भारतीय संस्कृति है: मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज
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पाषाण से भगवान की अभिव्यक्ति ही भारतीय संस्कृति है: मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज

जस्ट पोस्टBy जस्ट पोस्टApril 1, 2026No Comments2 Mins Read14 Views
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रांची। श्री दिगंबर जैन पंचासत के तत्वावधान में बिरसा मुंडा फन पार्क में बुधवार को श्री मज्जिनेंद्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के प्रथम दिन मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि जीवन में स्थिरता का आधार सयंम एवं अहिंसा है। उन्होंने कहा कि पंचकल्याणक केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मकल्याण की जागृति का पर्व है। मनुष्य यदि अपने भीतर छिपे क्रोध, अहंकार और लोभ को जीत ले, तो उसका जीवन स्वत: पावन बन जाता है।
एक चट्टान थी सैलानी उसे पर बैठकर अठखेलियां करते थे कभी-कभी धोबी उसे पर बैठकर कपड़ा धोता था एक दिन एक शिल्पी की नजर उस चट्टान पर पड़ी उसने उस चट्टान को सलीके से निकाला और अपने वर्कशॉप पर ले जाकर तरसना शुरू किया देखते ही देखते उसे पत्थर से भव्य प्रतिमा प्रकट हुई जैसे ही प्रतिमा प्रकट हुई। भगवान की तरह स्वीकार कर वह गया हर पहचान में भगवान है। पाषाण से भगवान की अभिव्यक्ति ही भारतीय संस्कृति है। साथ ही संस्कारों की बात बताते हुए मुनिश्री ने कहा कि बच्चों में संस्कार जन्म से पूर्व मां के गर्भ से ही पनपते है, गर्भ कल्याणक का महत्व बताते हुए माता के सोलह स्वपन के विषय में बताया।
महाराजश्री ने घटयात्रा के आध्यात्मिक महत्व को समझाते हुए कहा कि यह यात्रा हमारे अंदर स्थित दिव्य जन्म के प्रतीक रूप में आत्मज्योति को प्रकट करती है। उन्होंने समाज से आग्रह किया कि धर्म को आडंबर नहीं, बल्कि व्यवहार में लाएं।
ये रहे शामिल
प्रदीप वाकलीवाल, जितेंद्र छाबड़ा, पूरनमल सेठी, पंकज पांड्या, राकेश गंगवाल, नरेंद्र पांड्या, प्रो. सुरेश पांड्या, छीतरमल गंगवाल, टीकमचंद झांझरी, कमल सेठी, प्रदीप काला, अनंत काला, प्रतिभा बड़जात्या, बिनीता सेठी, चंद्रकला पाटनी, मधु काला, संगीता दगड़ा, सुमन दगड़ा, पायल सेठी सहित कई अन्य राज्यों के भक्त शामिल थे।

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