
रांची। मत्स्य निदेशालय के सौजन्य से मत्स्य किसान प्रशिक्षण केंद्र शालीमार, धुर्वा में सोमवार को पांच दिवसीय मोती पालन प्रशिक्षण का शुभारंभ हुआ। प्रशिक्षण कार्यक्रम में सरायकेला, खूंटी, सिमडेगा, बोकारो, देवघर, जामताड़ा, धनबाद, पूर्वी सिंहभूम तथा रांची जिले के 180 किसान भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण शिविर के उद्घाटन समारोह में निदेशक (मत्स्य) अमरेन्द्र कुमार ने कहा कि मछलीपालन में राज्य निरंतर आगे बढ़ रहा है। जिस तरह से केज कल्चर में झारखंड का नाम पूरे देश में प्रसिद्ध है, उसी तरह से मोती पालन के क्षेत्र में राज्य को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि कम जगह तथा अल्प पूंजी में मोती पालन प्रारंभ किया जा सकता है। इस अवसर पर डॉ.रितेश शुक्ला, प्राध्यापक, संत जेवियर कॉलेज, रांची, प्रगतिशील मोती पालक बुधन सिंह पूर्ति सहित अन्य मत्स्य कृषक उपस्थित थे।
डॉ.रितेश कुमार शुक्ला ने पर्ल कल्चर पर परिचयात्मक व्याख्यान दिया और पर्ल कल्चर को मत्स्य पालन के साथ एकीकृत करने पर बल दिया। अपने व्याख्यान में उन्होंने पर्ल कल्चर की अवधारणा को विस्तार से समझाया, जिसे किसान आगामी पांच दिनों के प्रशिक्षण में सीखेंगे

