झारखंड के अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) ने राज्य के सभी जिलों के एनएएफआईएस (नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटीफिकेशन सिस्टम) शाखा में तैनात पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों के बार-बार होने वाले ट्रांसफर और सूचना के अभाव पर कड़ा रुख अपनाया है.सीआईडी मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि बिना सूचना के कर्मियों को हटाने या अन्य कार्यों में लगाने से अपराधियों के फिंगरप्रिंट डेटा अपलोड करने का महत्वपूर्ण कार्य बाधित हो रहा है. सीआईडी द्वारा जारी पत्र के अनुसार, फिंगर प्रिंट ब्यूरो जब जिलों की एनएएफआईएस शाखाओं से संपर्क करता है, तो अक्सर यह पता चलता है कि वहां तैनात प्रशिक्षित कर्मियों का तबादला कहीं और कर दिया गया है.इस बदलाव की सूचना सीआईडी मुख्यालय को नहीं दी जा रही है. इससे पहले नवंबर 2025 में भी इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए थे, जिनका पालन नहीं किया जा रहा है.एनएएफआईएस प्रणाली के तहत गिरफ्तार अभियुक्तों का फिंगरप्रिंट डेटा डिजिटल रूप से स्टोर किया जाता है. इसके लिए चयनित पुलिस पदाधिकारियों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है. प्रत्येक प्रशिक्षित कर्मी का अपना यूजर आईडी और पासवर्ड होता है, जिससे वे डेटा अपलोड करते हैं.कर्मियों के अचानक हट जाने से नए कर्मियों के पास एक्सेस नहीं होता, जिससे डेटा एनरोलमेंट का काम ठप पड़ जाता है. सीआईडी ने जिले के एसपी को निर्देश दिया है कि, तीन दिनों के भीतर अपने जिले के एनएएफआईएस शाखा में वर्तमान में तैनात सभी कर्मियों की पूरी विवरणी भेजी जाए.

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