सबको सम्मान पेंशन देने से संबंधित ड्राफ्टिंग तैयार करने को लेकर हुईं बैठक
सामाजिक विकास के मापदंड से आंदोलनकारी 50 वर्ष पीछे: पुष्कर महतो
रांची: वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि सरकार झारखंड आंदोलनकारियों को सम्मान पेंशन सुविधायें एवं लाभ देने के लिए प्रतिबद्ध हैं. 15 जून 2026 को मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक में आंदोलनकारियों को समान रूप से सम्मान पेंशन देने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सहमति से लाया जाएगा. साथ ही झारखंड आंदोलनकारी के बाल ,बच्चों एवं आश्रितों को सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने की दिशा में ठोस पहल कदमी हो चुका है. उन्होंने बताया कि क्षैतिज आरक्षण लागू करने के मामले में अब तक जो गड़बड़ियां हुई है उस पर भी संशोधन किया जाएगा एवं पैनी नजर रखी जाएगी.
श्री किशोर ने आज अशोक नगर स्थित अपने आवासीय परिसर में झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के साथ सबको सम्मान पेंशन देने से संबंधित ड्राफ्टिंग तैयार करने को लेकर हुईं बैठक करने के बाद उक्त बातें कहीं. मौके पर संस्थापक प्रधान सचिव पुष्कर महतो, केंद्रीय कोषाध्यक्ष श्रीमती सरोजिनी कच्छप,केंद्रीय सचिव दिवाकर साहू,प्रो. रतनलाल महतो, महमूद आलम,सूरज प्रसाद जायसवाल, पुनीत उरांव,दक्षिणी छोटा नागपुर प्रमंडल की अध्यक्ष श्रीमती रोजलीन तिर्की प्रभारी अनथन लकड़ा, कोल्हान प्रमंडल के अध्यक्ष विश्वजीत प्रमाणिक, सह प्रभारी मिहिर तिवारी, रांची जिला अध्यक्ष सुबोध कुमार लकड़ा उपाध्यक्ष अमर भेंगरा , विनोद महतो, मो आसिफ,हलधर महतो,खूंटी जिला अध्यक्ष विजय सिंह, भीमसेन सांगा, बोकारो जिला अध्यक्ष राजदेव महथा, चतरा जिला रामचंद्र राणा,राजू वर्मा, श्याम सुंदर राणा, धनबाद जिला अनूप कुमार शाह,हराधन मोदी, राजू खान, विक्रम यादव, मोइन अंसारी विश्वनाथ पाल दुर्योधन मंडल, गुमला जिला श्रीमती नीलू देवी लातेहार महुआटाड, राजेश लकड़ा ,रंजीत टोप्पो, पलामू से पर मंडलीय अध्यक्ष भादुल भुइयां,लोहरदगा जिला अध्यक्ष रामनंदन साहू ,हरि गोप, बुद्धेश्वर उरांव, कोडरमा जिला से संतोष सहाय, सत्यदेव राय सहित अन्य प्रमुख थे.
मौके पर झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के संस्थापक प्रधान सचिव पुष्कर महतो ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के समक्ष झारखंड आंदोलनकारियों को राजकीय मान सम्मान ,अलग पहचान, रोजी रोजगार नियोजन की गारंटी तथा सम्मान पेंशन राशि 50-50 हजार रु दिया जाना चाहिए. राज्य में सरकार के संकल्प का पालन नहीं होना एवं सरकार के आश्वासन पर अमल नहीं होने के कारण आंदोलनकारियों की समस्या विकराल है. उन्होंने कहा कि झारखंड अलग राज्य लंबे संघर्षों और लाखों शहादतों के बाद हुआ है. झारखंड आंदोलनकारियों के ऊपर हुए शोषण, दमन, अन्याय, अत्याचार के कारण वे सामाजिक एवं आर्थिक रूप से उपेक्षित एवं हाशिए पर हैं. राज्य बनने के बाद आंदोलनकारियों एवं उसके परिवार आर्थिक ,शैक्षणिक एवं सामाजिक विकास के मापदंड से 50 वर्ष पीछे चले गए हैं. आंदोलनकारियों एवं उनके परिवार को आर्थिक, शैक्षणिक एवं सामाजिक रूप से देश- दुनिया के मुख्य धारा से जोड़ने का दायित्व हमारे लोकप्रिय राज्य सरकार का है. सरकार न्याय के साथ सम्मान एवं समाज में स्वाभिमान से जीने का अधिकार झारखंड आंदोलनकारियों को स्वतंत्रता सेनानियों के समक्ष दे.

