
राजधानी रांची स्थित मौसम केंद्र की पहली गृह पत्रिका “झारखंड मौसम दर्पण” को हाल ही में दो महत्वपूर्ण पुरस्कार प्राप्त हुए हैं. पहले ही प्रयास में मिली इस बड़ी उपलब्धि ने मौसम केंद्र रांची के अधिकारियों और कर्मचारियों में नया उत्साह और गर्व का माहौल पैदा कर दिया है. इस पत्रिका का औपचारिक विमोचन 16 दिसंबर 2024 को रांची के स्मार्ट सिटी सभागार में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान किया गया था. यह कार्यक्रम मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की सेवा के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला का हिस्सा था. इस अवसर पर झारखंड के राज्यपाल महामहिम संतोष कुमार गंगवार ने “झारखंड मौसम दर्पण” का विमोचन किया था. कार्यक्रम में विभाग के अधिकारी, वैज्ञानिक और विभिन्न हितधारक भी मौजूद थे.
पूर्वोत्तर क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन में मिला दूसरा पुरस्कार
दिनांक 20 फरवरी 2026 को अगरतला में आयोजित पूर्व, पूर्वोत्तर और उत्तरी क्षेत्रों के संयुक्त क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन में मौसम केंद्र रांची की इस पत्रिका को महत्वपूर्ण सम्मान मिला. नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास) की ओर से ‘क’ क्षेत्र के कार्यालयों की श्रेणी (11 से 50 कर्मचारियों वाले कार्यालय) में वर्ष 2024-25 के लिए क्षेत्रीय राजभाषा का द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया. यह सम्मान राजभाषा हिंदी के प्रभावी उपयोग और कार्यालयी कार्यों में हिंदी को बढ़ावा देने के लिए दिया गया. इस उपलब्धि ने न केवल मौसम केंद्र रांची बल्कि पूरे क्षेत्र में कार्यरत आईएमडी कार्यालयों का गौरव बढ़ाया है.
रांची में भी उत्कृष्ट पत्रिका के लिए मिला सम्मान
इसके अलावा, दिनांक 17 फरवरी 2026 को आयोजित नगर राजभाषा कार्यान्वयन…
मौसम केंद्र रांची के अधिकारियों के अनुसार, इस पत्रिका का उद्देश्य मौसम विज्ञान से जुड़ी जानकारी, विभागीय गतिविधियों और वैज्ञानिक कार्यों को सरल हिंदी में लोगों तक पहुंचाना है. पहले अंक को मिली सफलता और पुरस्कारों से उत्साहित होकर अब पत्रिका के दूसरे अंक की तैयारी भी शुरू कर दी गई है, जो जल्द ही पाठकों के सामने होगा. अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी इस पत्रिका के माध्यम से मौसम विज्ञान और राजभाषा हिंदी के प्रसार को और मजबूत किया जाएगा.
संस्कार भारती में होली की धूम, सरस्वती वंदना से रंगारंग कार्यक्रम की शुरुआत
रांची में संस्कार भारती महानगर की ओर से चुटिया स्थित अनूप मजूमदार के आवास पर होली मिलन समारोह का आयोजन हर्षोल्लास, आत्मीयता और सांस्कृतिक गरिमा के साथ किया गया. कार्यक्रम में कला, साहित्य और संस्कृति से जुड़े लोगों ने भाग लेकर फागुन के रंगों को जीवंत बना दिया. आयोजन की शुरुआत से ही वातावरण उत्साह और सौहार्द्र से भर उठा. समारोह में आगत अतिथियों का स्वागत गुलाब की कली, अंगवस्त्र और अबीर अर्पित कर किया गया. इस आत्मीय स्वागत ने पूरे कार्यक्रम को एक पारिवारिक और सांस्कृतिक उत्सव का रूप दे दिया. उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं देते हुए सामाजिक समरसता और भाईचारे का संदेश दिया.
कार्यक्रम का औपचारिक शुभारम्भ संस्कार भारती के ध्येय गीत से हुआ, जिसकी सुमधुर प्रस्तुति सुजाता मजूमदार ने की. इसके बाद सरस्वती वंदना सुजाता मजूमदार और गणेश वंदना जे.पी. सिंह द्वारा भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत की गई. दीप प्रज्ज्वलन संस्कार भारती झारखंड प्रांत के अध्यक्ष डॉ सुशील अंकन द्वारा किया गया. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति में सामाजिक समरसता, प्रेम और सौहार्द्र का प्रतीक है. उन्होंने सभी से अपील की कि इस पर्व के माध्यम से समाज में प्रेम और भाईचारे के रंग फैलाएं.
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शृंखला में सुजाता मजूमदार ने “आज बिरज में होली रे रसिया” गीत प्रस्तुत कर पूरे वातावरण को फागुनी रंगों से सराबोर कर दिया. इसके साथ ही उन्होंने नागपुरी भाषा में भी होली गीत प्रस्तुत कर स्थानीय संस्कृति की छटा बिखेरी. जेपी सिंह ने पारंपरिक लोकगीतों के माध्यम से फागुन की मिठास को जीवंत किया. वहीं आर.एन. सिंह ने भोजपुरी गीत “रंगवा अउरी अबीर, खेलत भिंगेली बदरिया” गाकर माहौल को और भी उल्लासपूर्ण बना दिया. कुमकुम गौड़ ने लोकप्रिय भोजपुरी गीत “अंचरा में भरनी हो अबीर गुलाल…” की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया.
कार्यक्रम में काव्य पाठ भी आकर्षण का केंद्र रहा. कवि राकेश रमण ने “फॉगुन की गगरी” कविता के माध्यम से होली की मस्ती को शब्दों में पिरोया. कवि आशुतोष प्रसाद ने “आज हवा में उड़े अबीर, महके गली मोहल्ला…” की पंक्तियों से रंगों की बगिया का सजीव चित्र खींच दिया. वर्षा ऋतुराज ने “होली आई रे…” कविता से उत्सव का उल्लास व्यक्त किया. प्रमिला कपूर ने भी मधुर होली गीतों से माहौल को संगीतमय बना दिया. कार्यक्रम का विशेष आकर्षण भरतनाट्यम की कुशल नृत्यांगना गार्गी शोम की मनोहारी नृत्य प्रस्तुति रही. उनके नृत्य ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया और फागुन के उत्सव को और भी रंगीन बना दिया.

