रांची: झारखंड में मतदाता गहन पुनरीक्षण यानी SIR शुरू होने से पहले इसको लेकर सवाल उठने लगे हैं. मुस्लिम संगठन झारखंड तंजीम ने चुनाव आयोग को लिखित ज्ञापन देकर बिहार और बंगाल में मतदाताओं के जिस तरह से नाम कटे हैं, उसे देखते हुए झारखंड में पूरी पारदर्शिता के साथ मतदाता की पहचान करने का आग्रह किया है.

झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार को ज्ञापन सौंपते हुए झारखंड तंजीम के अध्यक्ष शमशेर आलम ने कहा कि एसआईआर में आधार नंबर अनिवार्य किए जाने से मतदाताओं की सही पहचान हो सकेगी. उन्होंने कहा कि नाम जोड़ने, जांच करने और आपत्ति सुनने के लिए कम से कम तीन से चार महीने का समय दिया जाए और बीएलओ को बिना जल्दबाजी किए काम करने का समय दिए जाए. इसके अलावा किसी भी मतदाता का नाम बिना कारण बताए वोटर लिस्ट से नहीं काटा जाए और जिसका नाम काटे उसे गांव मोहल्ला और वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से लगाया जाए.


झारखंड तंजीम ने नाम जोड़ने की प्रक्रिया को आसान बनाने का आग्रह करते हुए कहा है कि फॉर्म-6 ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से भरने की व्यवस्था की जाए. जिससे गरीबों, आदिवासियों, महिलाओं और अनपढ़ लोगों के लिए आसान हो सके. साथ ही इसके लिए विशेष मदद कैंप लगाया जाए. इस कार्य में प्रखंड अधिकारियों को फॉर्म भरवाने और जांच करने का काम करने का निर्देश दिया जाए. इसके अलावा अनावश्यक दस्तावेज ना मांगे जाए. अगर कोई बीएलओ भेदभाव करता है या गलत तरीके से नाम काटता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो.
किसी भी योग्य वोटर का नहीं कटेगा नाम: मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी

सीईओ के रवि कुमार ने कहा है कि किसी भी योग्य वोटर का नाम नहीं कटेगा. उन्होंने कहा कि एसआईआर देश में पहली बार नहीं हो रहा है, यह 12वीं बार हो रहा है. इसका उद्देश्य यह है कि योग्य व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में रहेगा और अयोग्य व्यक्ति का नाम उससे हटेगा. उन्होंने कहा कि भारत के संविधान में जो प्रावधान हैं, उसी के तहत सभी 18 वर्ष से ऊपर के योग्य नागरिक को मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा. जिसकी योग्यता नहीं है, उन सब का नाम वोटर लिस्ट से हटेगा.

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