वित्त विभाग, झारखंड सरकार द्वारा प्रोजेक्ट भवन में आयोजित प्री-बजट बैठक के दूसरे दिन परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए.फेडरेशन ऑफ झारखण्ड चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष किशोर मंत्री ने बैठक में शामिल होकर बजट 2026-27 के लिए परिवहन क्षेत्र को प्राथमिकता देने की मांग की.किशोर मंत्री ने कहा कि बस, ट्रक और लॉजिस्टिक्स सेवाएं केवल व्यवसाय नहीं बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन हैं. उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को मजबूत किए बिना रोजगार सृजन, व्यापार विस्तार और राजस्व वृद्धि संभव नहीं है. इसलिए परिवहन क्षेत्र को बजट में विशेष प्राथमिकता मिलनी चाहिए.साथ ही अत्यधिक पेनाल्टी व्यवस्था में सुधार कर मात्र 2 प्रतिशत ब्याज प्रणाली लागू करने, टैक्स बकाया रहने की स्थिति में भी प्रोविजनल टैक्स टोकन जारी करने की व्यवस्था करने का सुझाव दिया.
किशोर मंत्री ने 15 वर्ष पुराने बस और ट्रक स्क्रैप करने पर 5 से 10 लाख रुपये तक प्रोत्साहन देने तथा नई बस खरीद पर टैक्स में छूट देने की मांग रखी. उन्होंने बस परमिट, रूट और टाइम टेबल को पूरी तरह ऑनलाइन सिंगल विंडो सिस्टम से जोड़ने, ड्राइवर और कंडक्टर के लिए 10 से 15 लाख रुपये तक की बीमा योजना लागू करने और प्रत्येक जिले में ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना पर भी जोर दिया.इसके अलावा ई-बस और ई-ट्रक की खरीद पर सब्सिडी देने, ग्रीन ट्रांसपोर्ट को टैक्स इंसेंटिव प्रदान करने, सभी जिलों में ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर, आधुनिक बस टर्मिनल और ई-बस चार्जिंग स्टेशन की स्थापना तथा सड़क सुरक्षा के लिए संवेदनशील स्थलों पर कैमरा और सुरक्षा व्यवस्था के बजट में वृद्धि की मांग की गई.कहा कि यदि परिवहन क्षेत्र को बजट में प्राथमिकता दी जाती है तो इससे लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा, राज्य सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी और आम जनता को सस्ती, सुरक्षित और सुगम परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी. उन्होंने वित्त मंत्री से आग्रह किया कि इन सभी सुझावों को झारखण्ड बजट 2026-27 में शामिल कर राज्य के समग्र विकास को गति दी जाए.

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