बोकारो में वन विभाग की जमीन हड़पने से जुड़े मामले की सीआईडी (अपराध जांच विभाग) की जांच में यह बात सामने आई है कि भू-माफिया ने अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके दस्तावेजों में हेराफेरी की। इसके बाद रिकॉर्ड में छेड़छाड़ करके महज 1.03 एकड़ जमीन के म्यूटेशन को 103 एकड़ में तब्दील कर दिया गया।
मामला बोकारो के सेक्टर-12 स्थित उकरीद बस्ती निवासी इजहार हुसैन और अख्तर हुसैन से जुड़ा है, जिनपर फर्जीवाड़ा कर वन विभाग की जमीन हड़पने का आरोप है। अपराध जांच विभाग ने अपनी जांच में पाया है कि आरोपियों ने अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर राजस्व रिकॉर्ड में अपने नाम दर्ज करा लिए। जिस म्यूटेशन केस नंबर के आधार पर आरोपियों का नाम रिकॉर्ड में चढ़ाया गया, वह वास्तव में डिंपल देवी नामक महिला द्वारा दायर किया गया था, जिनका इस मामले से कोई लेना-देना ही नहीं है। इसके बावजूद आरोपियों का नाम डिंपल देवी की जगह डाल दिया गया।

जांच में यह बात भी सामने आई है कि आरोपियों ने पहले 1984 का एक सेल डीड पेश किया था। इस सेल डीड में दिखाया गया था कि उन्होंने केवल 2.75 एकड़ जमीन खरीदी है, लेकिन बाद में गिफ्ट डीड (दान पत्र) का सहारा लेकर यह दावा किया गया कि 1937 में पूरी जमीन उनके पूर्वजों को सेटल की गई थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि राजस्व रिकॉर्ड में आरोपियों के नाम पर 1.03 एकड़ जमीन दर्ज की गई थी, लेकिन जालसाजी कर इसे 103 एकड़ बना दिया गया।

बोकारो का मामला : सीआईडी ने पकड़ी बड़ी गड़बड़ी
सीआईडी ने बोकारो में वन विभाग की जमीन हड़पने के मामले में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पाई है। दरअसल, आरोपियों ने तेतुलिया मौजा स्थित वन विभाग की जमीन पर अपना दावा किया था। इसके बाद बाजार मूल्य से कम कीमत पर कई लोगों के हाथों जमीन की बिक्री कर दी गई। मामला सामने आने पर राज्य सरकार ने इसे चुनौती दी थी। फिर सीआईडी ने आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 और वन अधिनियम के तहत केस दर्ज किया। जानकारी के अनुसार, एक शेल कंपनी का गठन कर कंपनी के नाम पर जमीन खरीदी गई। इस घोटाले में सीआईडी के साथ ही ईडी भी मनी लाउंड्रिंग के पहलुओं पर जांच कर रही है। जांच में दस्तावेजों में हेरफेर कर जमीन बेचने का मामला सामने आया है।

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