झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले सियासी तापमान अचानक बढ़ गया है. इसकी सबसे बड़ी वजह उद्योगपति और वर्तमान में आंध्र प्रदेश से राज्यसभा सांसद परिमल नथवानी की चुनावी मैदान में संभावित एंट्री है. नथवानी के राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र खरीदे जाने के बाद दूसरी सीट का मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है.
नथवानी का झारखंड से पुराना नाता

परिमल नथवानी का झारखंड की राजनीति से पुराना और गहरा रिश्ता रहा है. वह वर्ष 2008 और 2014 में झारखंड से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं. खास बात यह है कि 2008 में जब उन्होंने पहली बार चुनाव जीता था, तब राज्य में मधु कोड़ा की सरकार थी, जबकि 2014 में उनकी जीत के समय हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री थे. राज्यसभा चुनाव के जटिल गणित और राजनीतिक प्रबंधन का लंबा अनुभव नथवानी के पक्ष में माना जाता है.

झारखंड में राज्यसभा चुनाव का इतिहास हमेशा से क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग की आशंकाओं से जुड़ा रहा है. ऐसे में इंडिया गठबंधन की एकजुटता कितनी मजबूत रहेगी. ये चुनाव का सबसे अहम सवाल बन सकता है.

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