राँची : रात के करीब 11 बजे होंगे। रांची के कांके स्थित रिनपास अस्पताल का परिसर लगभग शांत था। इलाज के लिए आए कुछ मरीज और सुरक्षा में तैनात गार्ड ही वहां मौजूद थे। इसी सन्नाटे के बीच एक 10 साल की मासूम बच्ची अकेली खड़ी थी। न मां साथ थी, न पिता। थोड़ी देर पहले जिन हाथों ने उसे थामा होगा, वही हाथ उसे अस्पताल के बाहर छोड़कर अंधेरे में कहीं गुम हो चुके थे। यह कोई कहानी नहीं, बल्कि रांची में सामने आई एक सच्ची और दिल को झकझोर देने वाली घटना है।


एक फोन कॉल जिसने बच्ची की जिंदगी की दिशा बदली
पीएलवी भारती शाहदेव की नजर जब उस बच्ची पर पड़ी तो उन्होंने जरा भी देर नहीं की। तुरंत डालसा सचिव राकेश रौशन को फोन कर पूरी जानकारी दी। यह वही पल था, जब एक अनजान बच्ची की तकलीफ सिस्टम की जिम्मेदारी बन गई। डालसा सचिव ने यह जानकारी उपर तक साझा की। न्यायामूर्ति सह झालसा के कार्यपालक अध्यक्ष सुजीत नारायण प्रसाद के निर्देश पर न्यायायुक्त सह डालसा रांची के अध्यक्ष रांची अनिल कुमार मिश्रा-1 के निर्देश पर आगे का टास्क डालसा सचिव राकेश रौशन को सौंपा गया। डालसा सचिव ने बिना समय गंवाए कार्रवाई शुरू की। बच्ची की देखरेख के लिए पीएलवी भारती शाहदेव और दीपक मुंडा को मौके पर तैनात किया गया।


रात भर सुरक्षित, ताकि डर और न बढ़े
उस मासूम को धर्मशाला में सुरक्षित रखा गया। कोशिश यही थी कि रात उसके लिए और डरावनी न हो। कोई सवाल नहीं पूछे गए, कोई दबाव नहीं बनाया गया। सिर्फ इतना ध्यान रखा गया कि बच्ची सुरक्षित रहे।

सुबह की पहली रोशनी के साथ इलाज और उम्मीद
सुबह होते ही चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम को सूचना दी गई। डीसीपीओ और सीडब्ल्यूसी को भी मामले से अवगत कराया गया। रिनपास ओपीडी में बच्ची का तत्काल इलाज कराया गया। डॉक्टरों ने उसकी स्थिति देखी, दवाएं दीं और जरूरी जांच की। इसके बाद व्यवहार न्यायालय की एंबुलेंस से चाइल्ड हेल्पलाइन टीम के साथ बच्ची को सीडब्ल्यूसी के समक्ष प्रस्तुत किया गया। वहां से उसे सुरक्षित शेल्टर में भेजने का निर्देश दिया गया।

अब सवाल माता पिता का
डालसा सचिव राकेश रौशन ने रिनपास के निदेशक से मुलाकात कर आग्रह किया कि अगर अस्पताल परिसर के सीसीटीवी कैमरों में बच्ची को छोड़ने वालों की कोई फुटेज मिले तो तुरंत साझा की जाए। कांके थाना प्रभारी को भी पूरे मामले की जानकारी दी गई है ताकि माता पिता की तलाश शुरू हो सके।

एक अपील, जो हर किसी तक पहुंचे
डालसा सचिव राकेश रौशन ने कहा कि अगर किसी को कहीं भी कोई बच्चा लावारिश हालत में दिखे तो नालसा हेल्पलाइन नंबर 15100 पर सूचना दें या सीधे डालसा कार्यालय से संपर्क करें। एक फोन कॉल किसी बच्चे की जिंदगी बदल सकता है।

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