राज्यपाल 
राज्यपाल महोदय ने कहा कि तकनीकी शिक्षा तभी सार्थक होती है, जब विद्यार्थी प्रयोग, नवाचार एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से सीखने का अवसर प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में Artificial Intelligence (AI), Robotics, Smart Systems तथा Digital Technologies का तेजी से विस्तार हो रहा है और आने वाला समय उन्हीं युवाओं का होगा, जो नई तकनीकों को सीखने, अपनाने एवं नवाचार करने की क्षमता रखते हों। उन्होंने हाल ही में आयोजित AI Summit का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारा देश इसमें अग्रणी भूमिका निर्वहन करने कि क्षमता रखता है।
माननीय राज्यपाल ने कहा कि झारखण्ड युवा शक्ति से परिपूर्ण राज्य है तथा यहाँ प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता केवल उचित मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीकी शिक्षा एवं अवसर उपलब्ध कराने की है। उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी तकनीक आधारित कौशल में दक्ष बनेंगे, तो वे केवल रोजगार पाने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले भी बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में देश “आत्मनिर्भर भारत”, “डिजिटल इंडिया”, “स्टार्टअप इंडिया” एवं “स्किल इंडिया” जैसे अभियानों के माध्यम से तकनीक एवं नवाचार आधारित विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी कौशल आधारित एवं व्यवहारिक शिक्षा पर विशेष बल दिया गया है और यह कार्यशाला उसी सोच को आगे बढ़ाने का एक सराहनीय प्रयास है।
राज्यपाल महोदय ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने ज्ञान एवं कौशल को निरंतर विकसित करें। साथ ही शिक्षकों एवं शिक्षण संस्थानों से भी अपेक्षा की कि वे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता एवं समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाएँ। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय कार्यशाला विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों के लिए ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी सिद्ध होगी तथा इससे तकनीकी शिक्षा को नई दिशा मिलने के साथ उद्योग एवं शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा।

