राँची( प्रातः धर्म सभा में परम पूज्य मुनि श्री सुयश सागर जी महाराज ने आज जैन ग्रन्थ ‘पद्मपुराण’ के आलोक में भगवान श्री राम और महाबली हनुमान के जीवन वृत्त पर मंगल देशना दी। मुनि श्री ने कहा कि राम और हनुमान का आदर्श चरित्र केवल पढ़ने या सुनने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में पूरी तरह उतारने के लिए है।धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री ने कहा, “जैन पद्मपुराण के अनुसार मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जीवन न्याय, त्याग और परम कर्तव्यपरायणता का साक्षात स्वरूप है। उन्होंने महलों के सुख को त्याग कर धर्म की रक्षा की। वहीं दूसरी ओर, हनुमान जी असीम शक्ति के धनी होने के बाद भी पूरी तरह निरहंकारी और समर्पित थे। हनुमान का चरित्र हमें सिखाता है कि शक्ति का उपयोग हमेशा धर्म और सेवा के कार्य में होना चाहिए, अहंकार में नहीं।”मुनि श्री सुयश सागर जी ने वर्तमान समाज की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में अपने महान संस्कारों को भूलती जा रही है। यदि परिवार और समाज को बिखरने से बचाना है, तो राम जैसी आज्ञाकारिता और हनुमान जैसी अटूट भक्ति से सीख लेनी चाहिए।इस अवसर पर स्थानीय जैन समाज के पदाधिकारी, पूर्व अध्यक्षगण पूरणमल सेठी, नरेन्द्र पांड्या,छितरमल गॅगवाल कोषाध्यक्ष प्रमोद झाँझरी, संजय छाबड़ा, पंकज पांड्या, राकेश गॅगवाल सौरभ विनायक्या, सुमीत पाटनी, संजय पाटनी, मनोज काला के अलावा गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version