
राँची: कहते हैं राजनीति में न कोई स्थायी दुश्मन होता है और न कोई स्थायी दोस्त. बस स्थायी होती है तो अपनी-अपनी सुविधा. झारखंड कांग्रेस और सत्ता के गलियारों में पिछले कुछ दिनों से जो चिट्ठी-पत्री का महाभारत चल रहा था, उस पर अचानक से शांति पर्व लागू हो गया है. कल तक जो वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के खिलाफ तर्कों की मिसाइलें दाग रहे थे और एक के बाद एक चिठ्ठी लिखकर मोर्चा खोले हुए थे, आज उन्हीं के कंधे से कंधा मिलाकर ऑल इज वेल का पोज दे रहे हैं. तस्वीरें झूठ नहीं बोलती. कह रही है कि झारखंड की तपती सियासी गर्मी में अचानक ‘शीत लहर’ चल पड़ी है. इस हृदय परिवर्तन के गवाह बने हैं कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू और तेलंगाना के डिप्टी सीएम मल्लू भट्टी विक्रमार्क.
चिट्ठियों का विराम
कुछ ही दिन बीते हैं जब राधाकृष्ण किशोर साहब ने अपने ही प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ तर्कों का ऐसा जाल बुना था कि मानो पूरी संगठन व्यवस्था पर ही सवालिया निशान लग गया हो. बड़े ही तार्किक और बौद्धिक अंदाज में एक के बाद एक पत्र लिखे जा रहे थे. ऐसा लग रहा था कि इन चिट्ठियों की स्याही से कोई नया सियासी अध्याय लिखा जाएगा. लेकिन, जैसे ही दिल्ली और हैदराबाद के बड़े कप्तानों की एंट्री हुई, सारे तर्क और सारे शिकवे-शिकायतें पल भर में कूल-कूल हो गए?
तेलंगाना का डोज या प्रभारी का जादू
राजनीतिक के जानकार अब इस मुलाकात के पीछे के गूढ़ रहस्यों को डिकोड करने में जुट गए हैं. आखिर ऐसा क्या हुआ कि सारे गिले-शिकवे धुएं की तरह उड़ गए. क्या यह तेलंगाना के डिप्टी सीएम का कोई विशेष साउथ इंडियन नुस्खा था या प्रभारी के. राजू का संगठनात्मक अनुशासन का डंडा. वजह जो भी हो, लेकिन नेताओं के चेहरों की मुस्कुराहट देखकर लग रहा था कि मानो कोई चिठ्ठी कभी लिखी ही नहीं गई थी.
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तस्वीर सब बयां करती है
इस पूरी मुलाकात के बाद जारी हुई तस्वीर ने शब्दों की अहमियत ही खत्म कर दी है. राधाकृष्ण किशोर और केशव महतो कमलेश का एक साथ बैठना यह साफ करता है कि मोर्चे बंद हो चुके हैं और अब मिलकर आगे की रणनीति पर काम होगा. वैसे भी, सामने राज्यसभा और विधानसभा की चुनौतियां हैं, ऐसे में घर की लड़ाई को ज्यादा लंबा खींचना किसी के सेहत के लिए ठीक नहीं था. देखना दिलचस्प होगा कि यह कूल-कूल अंदाज आने वाले दिनों में कितना टिक पाता है, या फिर किसी नई चिट्ठी का ड्राफ्ट अंदर ही अंदर तैयार हो रहा है.

