सरहुल के पावन अवसर पर काँके-पिठोड़िया स्थित प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में भव्य और आकर्षक सरहुल महोत्सव का आयोजन बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ किया गया। पूरे परिसर को पारंपरिक झारखंडी साज-सज्जा से सजाया गया, जिससे वातावरण पूर्णतः उत्सवमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं सरना संस्कृति के प्रतीकात्मक पूजन से हुई। इस अवसर पर ब्रह्मकुमारी दीदी राजमति बहन ने सरहुल पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व प्रकृति, पेड़-पौधों और धरती माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का संदेश देता है। उन्होंने बताया कि सरहुल हमें पर्यावरण संरक्षण, आपसी प्रेम और आध्यात्मिक जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

महोत्सव के दौरान पारंपरिक झारखंडी नृत्य, गीत-संगीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। स्थानीय कलाकारों एवं ग्रामीणों ने अपनी प्रस्तुति से पूरे कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए। सरहुल मिलन समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, ग्रामीणों एवं गणमान्य लोगों ने भाग लिया और आपसी भाईचारे तथा प्रेम का संदेश दिया।

इस अवसर पर मुख्य रूप से उर्मिला, सुनीता, लीला, प्रमिला, बसंती, पार्वती, लीला देवी, उर्मिला देवी, बसंती देवी, सुनीता देवी, पार्वती देवी, मंजू देवी, संतोषी देवी, नारायण भाई, संतोष भाई एवं बसंत भाई की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों के लिए पारंपरिक झारखंडी व्यंजनों का विशेष प्रबंध किया गया, जिसमें लोगों ने बड़े आनंद के साथ स्वाद लिया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने आयोजन की भूरी-भूरी प्रशंसा की और इसे संस्कृति एवं आध्यात्म का अद्भुत संगम बताया।

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version