Close Menu
Just PostJust Post
  • आज की बड़ी खबरें
  • झारखंड
  • बिहार
  • देश
  • दुनिया
  • राजनीति
  • खेल
  • बिजनेस
  • मनोरंजन
  • धर्म-अध्याय
  • लेख
Facebook X (Twitter) Instagram
Just PostJust Post
Facebook X (Twitter) Instagram WhatsApp
  • होम
  • देश
  • दुनिया
  • राज्य
    • झारखंड
    • बिहार
  • राजनीति
  • बिजनेस
  • खेल
  • मनोरंजन
  • धर्म-अध्याय
  • लेख
Just PostJust Post
  • आज की बड़ी खबरें
  • झारखंड
  • बिहार
  • देश
  • दुनिया
  • राजनीति
  • खेल
  • बिजनेस
  • मनोरंजन
  • धर्म-अध्याय
  • लेख
Home»Uncategorized»शख्सियत::कविताओं व गीत-गजलों की प्रस्तुति से सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देती हैं संपदा ठाकुर
Uncategorized

शख्सियत::कविताओं व गीत-गजलों की प्रस्तुति से सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देती हैं संपदा ठाकुर

जस्ट पोस्टBy जस्ट पोस्टMay 13, 2026No Comments4 Mins Read35 Views
Facebook Twitter WhatsApp Pinterest LinkedIn Tumblr Email Telegram Threads Copy Link
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email Threads Telegram WhatsApp Copy Link

“खुल के रो लीजिए दिल बहल जाएगा, दर्द अश्कों की सूरत में ढल जाएगा”


कविताएं व गीत-गजल आदि महज शब्दों की जादूगरी ही नहीं, बल्कि यह लोगों की नब्ज टटोलते हुए सामाजिक परिवर्तन व सशक्तिकरण का मार्ग भी प्रशस्त करती है।
यह समाज में व्याप्त कुरीतियों, अंधविश्वास और नाना प्रकार की विसंगतियों को दूर करने का माद्दा भी रखती है।
ऐसा मानना है झारखंड की राजधानी रांची के न्यू एजी कॉलोनी,कडरू निवासी श्रृंगार रस की प्रख्यात कवयित्री संपदा ठाकुर का। श्रीमती ठाकुर रचित कविताएं दिल को छू लेती है।
उनका मानना है कि
कविताओं व गीत-गजलों की संवेदनशीलता का व्यक्तिगत व सामाजिक प्रभाव होता है।
लोग अक्सर अपना दर्द, प्यार, गुस्सा, अकेलापन आदि शब्दों में नहीं कह पाते। कविताएं व गीत-गज़ल वो भाषा देती है। इससे व्यक्ति अकेला महसूस नहीं करता। काफी हद तक उसकी पीड़ा दूर होती है। संवेदनशील गीत और कविताएं लोगों को “दूसरे” की जगह खड़े होने पर विवश करती हैं।निराला की “भिक्षुक”, नागार्जुन की “अकाल और उसके बाद”, या फैज़ की “हम देखेंगे” ये सब शोषण, गरीबी, और अन्याय को सिर्फ आंकड़ा नहीं रहने देतीं। वो उसे मानवीय चेहरे देती हैं। इससे समाज में सहानुभूति बढ़ती है। जब लोग किसी किसान, मजदूर या बेघर की पीड़ा को गीत में सुनते हैं, तो उनके प्रति नजरिया बदलता है।
फैज़, साहिर, कैफी आज़मी ने तानाशाही, युद्ध, सांप्रदायिकता के खिलाफ गज़ल के जरिए बात की।
वहीं, लोकगीत और भक्ति गीत सांस्कृतिक पहचान बचाते हैं। रवींद्रनाथ टैगोर के गीतों ने बंगाल पुनर्जागरण को हवा दी, और भारत के राष्ट्रगान ने एकता का बिंब बनाया। संवेदनशील कला सांस्कृतिक स्मृति भी बनाती है। जो बात इतिहास की किताबें भूल जाती हैं, वो गीत-गज़लें याद करा देती हैं।
संपदा ठाकुर कहतीं हैं कि टूटे हुए इंसान को जोड़ना, और
सोए हुए समाज को जगाना कविताओं के माध्यम से संभव है। कविताएं सामाजिक समरसता और सशक्तिकरण में असरदार होती हैं। वो तर्क से पहले दिल को छूती हैं। जब दिल बदलता है, तो व्यवहार और समाज भी बदलता है।
भाषा,जाति, धर्म से परे दुख,प्यार, उम्मीद सबके एक जैसे होते हैं। कबीर, रहीम, नज़ीर अकबराबादी की कविताओं ने हिंदू-मुस्लिम, ऊंच-नीच के भेद को पिघलाया।
जिंदगी को कविताएं मानवीय चेहरे देती है।
जब पाठक या श्रोता उसकी जगह खुद को रखता है, तो पूर्वाग्रह टूटते हैं। निराला की “भिक्षुक” और नागार्जुन की “अकाल और उसके बाद” यही काम करती हैं।
कविताएं पहले दिल को छूती हैं। जब दिल बदलता है, तो व्यवहार और समाज भी बदलता है।
जो लोग बोल नहीं पाते, कवि उनकी तरफ से बोलता है। महादेवी वर्मा, सुभद्रा कुमारी चौहान, मुक्तिबोध ने स्त्रियों, आदिवासियों, शोषितों की आवाज़ उठाई।
रामधारी सिंह ‘दिनकर’, मैथिलीशरण गुप्त, फैज़ अहमद फैज़ की कविताओं ने गुलामी, गरीबी और भेदभाव के खिलाफ आत्मसम्मान जगाया।

संपदा ठाकुर का जीवन वृत्त

संपदा ठाकुर का जन्म बिहार के मुंगेर जिलांतर्गत ग्राम रतेठा (खड़गपुर) में हुआ। पिता संजीव रंजन पाठक व माता सरोजनी देवी के सानिध्य में उनका पालन-पोषण हुआ। बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि संपदा ठाकुर की अभिरुचि साहित्य में रही। पढ़ाई के दौरान उनके माता-पिता साहित्य के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए हमेशा प्रोत्साहित करते रहे। उनका उत्साहवर्द्धन किया। माता सरोजनी देवी राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय रहीं। वहीं,पिता संजीव रंजन पाठक बिहार सरकार से सेवानिवृत कर्मी हैं। संपदा की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा गांव में ही हुई। तत्पश्चात भागलपुर स्थित तिलकामांझी विश्वविद्यालय से स्नातक व स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। विवाह के बाद वह रांची चली आईं।
संपदा के पति सुदेश कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं और विगत दो दशक से रांची में पत्रकारिता से जुड़े हैं। राजनीति शास्त्र से एमए व राष्ट्रीय गौरव सम्मान से सम्मानित संपदा देश के कई नामचीन कवियों के साथ मंच साझा कर चुकी हैं। इनमें कामता माखन, डॉ. भुवन मोहिनी, सुरेश अलबेला, जाॅनी बैरागी सहित अन्य शामिल हैं।
वह राजस्थान, हरियाणा, इंदौर, फतेहपुर, फतेहाबाद, गाजियाबाद सहित अन्य जगहों पर कविताएं व गीत-गजलों की प्रस्तुति से अपनी प्रतिभा का परचम लहरा चुकी हैं। उनकी काव्य रचनाओं में रिवीजिटिंग मुंशी जी, सृष्टि तरंग, कुसूर किसका, जीने की जिद, रूद्र प्रिया आदि हैं। मृत्युंजय और नेमतें उनकी सर्वश्रेष्ठ रचनाएं हैं। देश के विभिन्न समाचार पत्रों में उनकी कविताएं व गीत-गजल आदि प्रकाशित होते रहे हैं। संपदा की उत्कृष्ट उपाधि के लिए उन्हें ब्राह्मण योद्धा फाउंडेशन, नव जन जागरण अवार्ड, महिला शक्ति सम्मान पत्र, श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान, काव्य रत्न सम्मान, काव्य शिरोमणि सम्मान, कोरोना योद्धा सम्मान, पुनीत अनुपम साहित्यिक सम्मान और राष्ट्रीय गौरव सम्मान से भी नवाजा गया है।

Share. Facebook Twitter Email Threads Telegram WhatsApp Copy Link
जस्ट पोस्ट
  • Website

Related Posts

मोदी सरकार के 12 साल उपलब्धियां नहीं 24 गबनों का कार्यकाल रहा : सुप्रियो भट्टाचार्य

June 29, 2026

राम और हनुमान का चरित्र त्याग, भक्ति और आदर्श का शिखर: मुनि श्री सुयश सागर जी

June 29, 2026

दिल्ली में राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में शामिल हुई मंत्री दीपिका पांडेय सिंह

June 29, 2026

खनन संविदाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु क्षमता संवर्धन कार्यक्रम का आयोजन

June 29, 2026

बुढ़मू में महिला ने फांसी लगाकर की आत्महत्या

June 29, 2026

मानव अधिकार और समावेशी विकास पर राष्ट्रीय मंथन: ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना से ही बनेगा समृद्ध भारत: न्यायमूर्ति विद्युत रंजन सारंगी

June 29, 2026
Add A Comment
Leave A Reply Cancel Reply

अभी-अभी

मोदी सरकार के 12 साल उपलब्धियां नहीं 24 गबनों का कार्यकाल रहा : सुप्रियो भट्टाचार्य

June 29, 2026

राम और हनुमान का चरित्र त्याग, भक्ति और आदर्श का शिखर: मुनि श्री सुयश सागर जी

June 29, 2026

दिल्ली में राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में शामिल हुई मंत्री दीपिका पांडेय सिंह

June 29, 2026

खनन संविदाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु क्षमता संवर्धन कार्यक्रम का आयोजन

June 29, 2026

बुढ़मू में महिला ने फांसी लगाकर की आत्महत्या

June 29, 2026
© 2026 Just Post. Designed by Launching Press.
  • About Us
  • Contact Us
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Terms and Conditions
  • AdSense Policy

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.