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Home»Uncategorized»रांची में सरहुल पर्व की तैयारी तेज, फांसी टुंगरी में पारंपरिक रीति से सरना झंडागड़ी और प्रार्थना सभा आयोजित
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रांची में सरहुल पर्व की तैयारी तेज, फांसी टुंगरी में पारंपरिक रीति से सरना झंडागड़ी और प्रार्थना सभा आयोजित

जस्ट पोस्टBy जस्ट पोस्टMarch 16, 2026No Comments2 Mins Read14 Views
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रांची: झारखंड की राजधानी Ranchi में आदिवासी समाज के प्रमुख पर्व Sarhul को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में Kendriya Sarna Samiti के नेतृत्व में फांसी टुंगरी स्थित Pahari Mandir परिसर में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सरना झंडागड़ी और प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में सरना धर्मावलंबी एकत्र हुए और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच प्रकृति पूजा की परंपरा निभाई गई। इस वर्ष सरहुल पर्व 21 मार्च को मनाया जाएगा।

कार्यक्रम का नेतृत्व केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष Ajay ने किया। इस मौके पर पाहन द्वारा पहाड़ी की चोटी पर सरना झंडा गाड़कर प्रकृति और समस्त जीव-जगत की खुशहाली की कामना की गई। पूजा-अर्चना के दौरान मानव समाज के साथ-साथ पशु-पक्षी, पेड़-पौधे, वनस्पति, नदी-नाले और पहाड़-पर्वत में रहने वाले सभी जीवों के सुख, शांति और स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की गई।
अजय तिकों ने बताया कि फांसी टुंगरी आदिवासी समाज के पूर्वजों का एक पवित्र पूजा स्थल रहा है।

पहले यहां स्वर्गीय बुधवा पाहन द्वारा पूजा-अर्चना की जाती थी और आज भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सरना धर्मावलंबी यहां एकत्र होकर प्रकृति पूजा करते हैं।
कार्यक्रम के दौरान सिरमटोली पहनाई Anita Hans, Ajay Kachhap और Neeraj Munda ने समाज के लोगों से अपील की कि सरहुल पर्व के दौरान अपने घरों में सरना झंडा लगाएं और इस पवित्र अवसर पर नशा-पान से दूर रहें। सरना समिति के पदाधिकारी Khana Oraon ने भी कहा कि आदिवासी समाज को अपने पारंपरिक पर्व-त्योहार और रीति-रिवाजों को मूल स्वरूप में बनाए रखना चाहिए।

राजीव पड़हा सरना प्रार्थना सभा के अध्यक्ष नीरज मुंडा ने बताया कि फांसी टुंगरी में सरना झंडागड़ी की परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है। कार्यक्रम के दौरान वार्ड 29 के पार्षद Sunil Yadav ने भी सरना धर्मावलंबियों का माला पहनाकर स्वागत किया।

आदिवासी संस्कृति में सरहुल पर्व को प्रकृति पूजा, सामुदायिक एकता और परंपराओं के संरक्षण का प्रतीक माना जाता है। इस पर्व के माध्यम से समाज प्रकृति के प्रति अपनी आस्था और सम्मान व्यक्त करता है।

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