रांचीः झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी के बीच भाजपा ने एक सीट पर उम्मीदवार उतारने का फैसला लिया है। आंकड़ों के अनुसार भाजपा के पक्ष में 24 वोट आने की उम्मीद है, जो जीत के लिए जरूरी वोट से 4 कम है। इसके बावजूद भाजपा नेतृत्व को सत्तापक्ष के तीन विधायकों की अंतरात्मा से उम्मीद है। इसे लेकर पार्टी ने अभी से रणनीति बनानी शुरू कर दी है
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राज्यसभा चुनाव में बीजेपी इस बार आदिवासी कार्ड पर दांव खेल सकती है। ऐसे में पार्टी की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य आशा लकड़ा को उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा है। वहीं इन दिनों बीजेपी में आईआरएस अधिकारी निशा उरांव का नाम भी तेजी से सामने आया है। हालांकि अभी पार्टी नेता इस बारे में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। इसके अलावा भाजपा एसटी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष समीर उरांव और पूर्व आईपीएस अधिकारी अरुण उरांव के नाम की भी चर्चा है।
भाजपा किसी निर्दलीय को नहीं करेगी समर्थन

झारखंड भाजपा चुनाव समिति की बैठक के बाद यह साफ हो गया है कि पार्टी किसी निर्दलीय के लिए वोट नहीं करेगी और खुद उम्मीदवार उतारेगी। हालांकि प्रत्याशी का ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन एक सीट पर जीत का दावा किया जा रहा है। भाजपा नेताओं को सत्ता पक्ष के विधायकों की अंतरात्मा की आवाज से उम्मीदें दिखाई पड़ रही है।

चार विधायकों का समर्थन करना होगा हासिल

झारखंड विधानसभा में भाजपा विधायकों की संख्या 21 है, जबकि जदयू, लोजपा-आर और आजसू पार्टी के एक-एक विधायक भी एनडीए फोल्डर में शामिल है। इस तरह से एनडीए विधायकों की संख्या 34 हो जाती है। इसके बावजूद भाजपा को जीत के लिए वोट का इंतजाम करना होगा। फिलहाल झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के जयराम महतो किसी पाले में नहीं है। ऐसे में एनडीए की ओर से जयराम महतो का समर्थन ह…
: नितिन नवीन 5-6 को रांची में, चुनावी रणनीति पर होगी चर्चा

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 5 और 6 जून को रांची में रहेंगे। इस दौरान राज्यसभा चुनाव के मसले पर भी वो पार्टी नेताओं के सात चर्चा करेंगे। यह भी संभव है कि राज्यसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार के नामांकन में भी नितिन नवीन शामिल हो।

भाजपा की रणनीति से जेएमएम को पहले भी लग चुका है झटका

भाजपा की चुनावी रणनीति काफी आक्रमक होती है। इसी कारण भाजपा नेताओं के ऐलान के तुरंत बाद जेएमएम की ओर से भारत निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर सतर्कता बरतने की अपील की गई और केंद्रीय एजेंसियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देने की अपील की गई। 2016 के चुनाव में जेएमएम प्रत्याशी बसंत सोरेन चुनाव हार गए थे। उस वक्त कांग्रेस विधायक बिट्टू सिंह और चमरा लिंडा वोट करने नहीं करने पहुंचे, जिसके कारण भाजपा के मुख्तार अब्बास नकवी और महेश पोद्दर को जीत मिली थी।

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version