रांची। झारखंड में अब सार्वजनिक आयोजनों और हाट-बाजारों की सूरत बदलने वाली है। राज्य में बढ़ते प्रदूषण और प्लास्टिक के बेतहाशा इस्तेमाल पर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा प्रहार किया है। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्पष्ट कर दिया है कि अब सरकारी आदेशों की खानापूर्ति और बयानबाजी नहीं चलेगी। कोर्ट ने राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया है कि बिना अनुमति और जमानत राशि (Security Deposit) जमा किए अब कहीं भी बाजार या बड़े आयोजन नहीं होंगे।
बाजार लगाने के लिए देनी होगी आर्थिक जमानत
अदालत ने आदेश दिया है कि स्थानीय निकायों की अनुमति के बिना अब कोई भी हाट-बाजार नहीं लगाया जा सकेगा। खास बात यह है कि बाजार संचालकों को अब एक निश्चित जमानत राशि जमा करनी होगी। यह राशि तभी वापस मिलेगी जब बाजार खत्म होने के बाद स्थल पूरी तरह साफ पाया जाएगा और वहां से प्रतिबंधित प्लास्टिक कचरा हटा लिया जाएगा। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि 19 सितंबर 2025 के आदेश के बावजूद जमीनी स्तर पर प्लास्टिक बैन का असर नहीं दिख रहा है, जो प्रशासन की इच्छाशक्ति की कमी को दर्शाता है।
शादी और रैलियों पर ‘प्रदूषण शुल्क’: प्रति व्यक्ति ₹10 का नियम
हाईकोर्ट का सबसे बड़ा फैसला सार्वजनिक आयोजनों को लेकर आया है। अब किसी भी ऐसे आयोजन में जहाँ 500 से अधिक लोग जुटने वाले हैं, वहां प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इतना ही नहीं, आयोजकों को प्रति व्यक्ति 10 रुपये की दर से अग्रिम राशि (Advance Amount) बोर्ड के पास जमा करनी होगी। उदाहरण के तौर पर, यदि 1000 लोगों का कोई कार्यक्रम है, तो 10,000 रुपये जमा करने होंगे। कार्यक्रम के बाद अगर स्थल प्लास्टिक मुक्त और साफ मिलता है, तभी यह पैसा वापस होगा।
NH-33 पर पौधरोपण और 8 करोड़ का हिसाब
सुनवाई के दौरान अदालत ने एनएच-33 (हजारीबाग से बरही) के चौड़ीकरण के दौरान हुए पौधरोपण पर भी जवाब तलब किया है। एनएचएआई (NHAI) को निर्देश दिया गया है कि वे बताएं कि पौधरोपण के लिए आवंटित 8 करोड़ रुपये में से कितनी राशि खर्च हुई, कितने पौधे लगाए गए और उनमें से कितने आज जीवित हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि फाइलों में पौधे उगाने के बजाय जमीन पर हरियाली दिखनी चाहिए।
नॉन-डिग्रेडेबल प्लास्टिक पर ‘क्रैकडाउन’ के आदेश
कोर्ट ने नगर विकास सचिव और सभी नगर आयुक्तों को नॉन-डिग्रेडेबल प्लास्टिक की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध (Crackdown) लगाने का आदेश दिया है। अधिकारियों को अब इस संबंध में शपथ पत्र दाखिल कर बताना होगा कि उन्होंने प्लास्टिक मुक्त झारखंड बनाने के लिए क्या कदम उठाए हैं। हाईकोर्ट की इस सख्ती ने नगर निकायों और प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। मामले की अगली सुनवाई अब 5 जनवरी को होगी।


