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Home»Uncategorized»मोहन भागवात का बड़ा बयान, बोले- जनजातीय समुदाय और हिंदू अलग नहीं,
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मोहन भागवात का बड़ा बयान, बोले- जनजातीय समुदाय और हिंदू अलग नहीं,

जस्ट पोस्टBy जस्ट पोस्टJanuary 25, 2026No Comments2 Mins Read0 Views
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रांची : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत शनिवार को राजधानी रांची में थे. जहां उन्होंने डीबडीह में जनजातीय संवाद कार्यक्रम को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज और हिंदू समाज अलग नहीं है. मोहन भागवत का कहना था कि हिंदू किसी पूजा पद्धति का नाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति है, जहां अलग-अलग सोच और परंपराओं के बावजूद सबको जोड़कर रखने की भावना होती है

धर्म का मूल अर्थ सत्य, सेवा और परोपकार : मोहन भागवत
मोहन भागवत ने कहा कि हजारों वर्षों से भारत की सभ्यता जंगल, खेती और प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर आगे बढ़ी है. वेद और उपनिषद भी इसी तरह की जीवन जीने की सोच से निकले हैं. उन्होंने कहा कि धर्म का मूल अर्थ सत्य, सेवा, परोपकार और संयम है. जब समाज सिर्फ मौज-मस्ती और अपने फायदे में उलझ गया, तो लोगों के बीच दूरी बढ़ी और बाहर से आने वालों ने इसका फायदा उठा लिया.
[12:12 pm, 25/1/2026] Sandeep Jain: मोहन भागवत ने कहा कि विश्व में एक ही धर्म है -मानव धर्म. यही हिंदू धर्म का मूल स्वरूप है. उन्होंने जनजातीय समाज की शिक्षा, रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि बच्चों को बचपन से ही अपनी संस्कृति, परंपरा और गौरव की शिक्षा दी जानी चाहिए. इससे वे कभी भटकेंगे नहीं और यदि भटक भी जायें, तो अपनी जड़ों की ओर वापस लौट आयेंगे.

संगठित होकर ही कर सकते हैं धर्मांतरण का सामना : मोहन भागवत
मोहन भागवत ने कहा कि आज के समय में आदिवासी जमीन की सुरक्षा, मेहनत करने वालों को सम्मान, लोकल लेवल पर रोजगार और समाज में आपसी तालमेल बहुत जरूरी है. धर्मांतरण, जमीन कब्जाने, शोषण और जनसंख्या में बदलाव जैसी दिक्कतों से तभी निपटा जा सकता है जब समाज एकजुट हो. उन्होंने लोगों से खुद पर भरोसा करने, आत्मनिर्भर बनने और बाहर की ताकतों पर निर्भर बंद रहने की सलाह दी है.

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