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Home»Uncategorized»मोदी सरकार का बजट दिशाहीन, शेयर बाजार गिरा, जनता निराश : आलोक कुमार दुबे
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मोदी सरकार का बजट दिशाहीन, शेयर बाजार गिरा, जनता निराश : आलोक कुमार दुबे

जस्ट पोस्टBy जस्ट पोस्टFebruary 1, 2026No Comments4 Mins Read1 Views
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रांची।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट 2026–27 पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दुबे ने इसे झूठे वादों का पुलिंदा करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल पूंजीपतियों के लिए कर्तव्य निभाने वाला है, जबकि झारखंड जैसे पिछड़े राज्य के लिए इसमें कुछ भी नया नहीं है। आलोक कुमार दुबे ने कहा कि यह बजट आम आदमी की जेब काटने और कॉर्पोरेट मित्रों को टैक्स हॉलिडे का उपहार देने वाला दस्तावेज है।

उन्होंने कहा कि बजट पेश होते ही शेयर बाजार में भारी गिरावट यह साफ दर्शाती है कि सरकार की आर्थिक नीतियों पर अब निवेशकों का भरोसा भी डगमगा चुका है। यह बजट देश की वास्तविक आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों से आंख मूंदे कहा कि आज देश में युवाओं के पास रोजगार नहीं है, उत्पादन क्षेत्र लगातार गिरावट में है, निवेशक अपनी पूंजी निकाल रहे हैं, घरेलू बचत तेजी से घट रही है और किसान गहरे संकट में हैं, लेकिन बजट में इन समस्याओं का कोई समाधान नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर मंडरा रहे आर्थिक झटकों को भी सरकार ने पूरी तरह नजरअंदाज किया है। ऐसा बजट जो समय रहते दिशा बदलने से इनकार करता हो और देश के वास्तविक संकटों के प्रति आंख मूंदे बैठा हो, उससे जनता को कोई राहत नहीं मिल सकती।
कहा कि सरकार का तथाकथित मिशन मोड अब भटकाव के रास्ते पर है और सुधारों की रेल किसी भी सुधार के स्टेशन पर रुकने को तैयार नहीं है। नतीजा स्पष्ट है—न कोई नीतिगत दृष्टि है और न ही राजनीतिक इच्छाशक्ति।

उन्होंने कहा कि देश के अन्नदाता किसान आज भी सम्मानजनक आय और आय-सुरक्षा योजना का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन बजट में उनके लिए केवल खोखले दावे हैं। आज देश में आर्थिक असमानता ब्रिटिश शासन के दौर से भी अधिक बढ़ चुकी है, फिर भी बजट में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और अल्पसंख्यक समुदायों के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया है।

राज्य सरकारों की बदहाल वित्तीय स्थिति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि वित्त आयोग की सिफारिशें राज्यों को कोई वास्तविक राहत नहीं देती दिखतीं, जिससे राज्यों पर आर्थिक दबाव और बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि संघीय ढांचा आज केंद्र सरकार की नीतियों की बलि चढ़ चुका है।

केंद्रीय संस्थानों की तर्ज पर रांची के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान को अपग्रेड करने के प्रस्ताव पर उन्होंने कहा कि यह पुरानी घोषणाओं का नया कवर है। झारखंड को विशेष राज्य का दर्जा या बड़े औद्योगिक पैकेज की दरकार थी, जिसे केंद्र ने सिरे से खारिज कर दिया।
आलोक कुमार दुबे ने कहा कि विदेशी यात्रा पैकेज पर टैक्स कम करने से केवल अमीर वर्ग को फायदा होगा। मध्यम वर्ग को उम्मीद थी कि आयकर की सीमा में बड़ी राहत मिलेगी, लेकिन सरकार ने नया आयकर अधिनियम लाकर केवल उलझाने का काम किया है।
आलोक कुमार दुबे ने कहा कि 10,000 करोड़ की एसएमई निधि ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। झारखंड के लाखों एमएसएमई उद्यमी बिजली और कच्चे माल की समस्याओं से जूझ रहे हैं, उनके लिए बजट में कोई विशेष राहत नहीं है।

आलोक कुमार दुबे ने कहा कि बजट में उत्पादन क्षेत्र पूरी तरह उपेक्षित है, जो 13 प्रतिशत पर अटका हुआ है और इसके पुनर्जीवन की कोई रणनीति नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि रोजगार सृजन को लेकर सरकार के पास कोई ठोस योजना नहीं है, न युवाओं के लिए और न ही महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए, जबकि पिछली कौशल विकास योजनाओं का कोई मूल्यांकन तक नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि निर्यात और व्यापार के मोर्चे पर बजट पूरी तरह मौन है—निर्यात में गिरावट, बढ़ते व्यापार घाटे, शुल्क संबंधी जोखिमों और कमजोर होती मुद्रा पर कोई चर्चा नहीं की गई। उन्होंने कहा कि गरीब और मध्यम वर्ग को बजट से कोई राहत नहीं मिली, महंगाई बरकरार है, बचत घट रही है, कर्ज बढ़ रहा है और वेतन स्थिर बना हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि निजी और विदेशी निवेशकों के भरोसे में आई गिरावट को सरकार ने पूरी तरह नजरअंदाज किया है। आधारभूत ढांचे को लेकर उन्होंने कहा कि बजट में पुराने वादों की पुनरावृत्ति की गई है, लेकिन शहर आज भी रहने योग्य नहीं बन पाए हैं। वहीं सामाजिक सुरक्षा और कल्याण के मामले में बजट पूरी तरह खाली है—ग्रामीण रोजगार योजना की जगह लाए गए नए कानून के लिए बजट में एक शब्द तक नहीं है।

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