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Home»Uncategorized»सदा के लिए खामोश हो गए बिशप हार्टमैन अकादमी के उप-प्राचार्य ज्योति प्रकाश तिग्गा
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सदा के लिए खामोश हो गए बिशप हार्टमैन अकादमी के उप-प्राचार्य ज्योति प्रकाश तिग्गा

जस्ट पोस्टBy जस्ट पोस्टApril 15, 2026No Comments5 Mins Read1 Views
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रांची : बिशप हार्टमैन अकादमी के गलियारों में हमेशा एक जाना-पहचाना चेहरा नजर आता था। सधी हुई आवाज, बच्चों से अपनापन और काम को लेकर सख्त अनुशासन। यही पहचान थी स्कूल के उप-प्राचार्य ज्योति प्रकाश तिग्गा की। लेकिन 13 अप्रैल की शाम वह चेहरा हमेशा के लिए खामोश हो गया। उनके अचानक निधन की खबर जैसे ही फैली, स्कूल से लेकर शिक्षा जगत तक गहरी उदासी छा गई।

स्कूल का हर कोना जहां उनकी मौजूदगी महसूस होती थी
बिशप हार्टमैन अकादमी में पढ़ने वाले बच्चों के लिए ज्योति प्रकाश तिग्गा सिर्फ उप-प्राचार्य नहीं थे, वे एक ऐसे मार्गदर्शक थे जो पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों के व्यवहार, अनुशासन और आत्मविश्वास पर भी उतना ही ध्यान देते थे। कई शिक्षक बताते हैं कि वे रोजाना कक्षाओं का निरीक्षण करते, बच्चों से बात करते और जरूरत पड़ने पर खुद समझाते थे। स्कूल में कोई बच्चा परेशान हो या किसी को पढ़ाई में दिक्कत हो, तिग्गा सर बिना समय देखे उसकी मदद करने पहुंच जाते थे। उनकी ये आदत उन्हें बाकी लोगों से अलग बनाती थी।


बच्चों के भविष्य के लिए लगातार सोचते रहते थे
स्कूल के स्टाफ बताते हैं कि ज्योति प्रकाश तिग्गा हमेशा स्कूल को बेहतर बनाने की सोच में लगे रहते थे। छात्रों के लिए नई गतिविधियां शुरू करना, पढ़ाई के स्तर को मजबूत करना, परीक्षा की तैयारी को व्यवस्थित करना और बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाना, यह सब उनके काम का हिस्सा था। उनके कार्यकाल में स्कूल में कई ऐसे बदलाव हुए जिनसे विद्यार्थियों को सीधा फायदा मिला। शिक्षक कहते हैं कि वे हमेशा कहते थे, “बच्चों को सिर्फ किताबें नहीं, जिंदगी भी पढ़ानी है।”

हादसे से पहले भी वही जिम्मेदारी निभा रहे थे
13 अप्रैल की शाम भी वह किसी निजी काम से नहीं, बल्कि अपने काम के कारण ही वहां पहुंचे थे। चर्च परिसर में निर्माण कार्य चल रहा था और जानकारी के अनुसार वे उसी निर्माण स्थल का निरीक्षण करने गए थे। बताया जा रहा है कि उस समय वहां कुछ ब्रादर खेल रहे थे और ज्योति प्रकाश तिग्गा निर्माण की स्थिति देखने अकेले चले गए। काफी देर तक जब वे वापस नहीं लौटे तो लोग चिंतित हुए और उन्हें देखने पहुंचे।

जब लोग पहुंचे, तो नीचे पड़ा मिला उनका शरीर
जो लोग उन्हें देखने गए, उनके लिए वह दृश्य बेहद डरावना था। बताया जा रहा है कि वे निर्माण स्थल पर नीचे गिरे हुए मिले। आशंका जताई जा रही है कि वे फिसलकर नीचे गिर गए और सिर में गंभीर चोट लग गई। लोगों का कहना है कि वहां एक नया बालकनी और सीढ़ी वाला हिस्सा बना हुआ था। उस जगह पर सुरक्षा के लिए रेलिंग पूरी तरह नहीं लगी थी। माना जा रहा है कि संतुलन बिगड़ने पर वह नीचे गिर गए।

अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बचाया नहीं जा सका
घटना के बाद उन्हें तुरंत इलाज के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई। यह खबर जैसे ही स्कूल पहुंची, वहां एकदम सन्नाटा छा गया। शिक्षक, कर्मचारी और छात्र विश्वास नहीं कर पा रहे थे कि जिनसे वे रोज मिलते थे, आज वे नहीं रहे।

ओडिशा से झारखंड तक का सफर, शिक्षा सेवा की पहचान
ज्योति प्रकाश तिग्गा मूल रूप से ओडिशा के रहने वाले थे। लेकिन उन्होंने झारखंड को अपना कर्मक्षेत्र बनाया और लंबे समय तक शिक्षा सेवा में योगदान दिया। लोग बताते हैं कि वे काम को लेकर बेहद ईमानदार थे। समय के पाबंद, नियमों के सख्त, लेकिन बच्चों के प्रति नरम दिल। यही वजह थी कि स्कूल के कई छात्र उन्हें डर के साथ-साथ सम्मान से भी देखते थे।

छात्रों के बीच भी छा गया सन्नाटा
उनके निधन की खबर के बाद स्कूल के कई छात्र भावुक नजर आए। कुछ बच्चों ने बताया कि वे हमेशा कहते थे कि मेहनत से बड़ा कोई रास्ता नहीं होता। कई छात्रों ने यह भी कहा कि वे पढ़ाई के साथ-साथ खेल और अनुशासन को भी उतनी ही अहमियत देते थे।

अंतिम संस्कार 15 अप्रैल को खूंटी में
स्कूल के प्रिंसिपल ओसवाल मार्था ने बताया कि ज्योति प्रकाश तिग्गा का अंतिम संस्कार 15 अप्रैल को शाम 3 बजे खूंटी में किया जाएगा। स्कूल प्रशासन और स्टाफ के कई लोग अंतिम विदाई में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।

शिक्षा जगत ने बताया अपूरणीय क्षति
शिक्षा जगत से जुड़े कई लोगों ने उनके निधन पर शोक जताया है। लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि शिक्षा क्षेत्र में एक मजबूत स्तंभ का टूट जाना है।

स्कूल में अब भी उनकी कमी महसूस हो रही है
बिशप हार्टमैन अकादमी में आज भी कई लोग यह मानने को तैयार नहीं कि ज्योति प्रकाश तिग्गा अब नहीं रहे। उनके कमरे का दरवाजा, उनकी फाइलें, उनकी कुर्सी, सब कुछ वैसा ही है, लेकिन वह आवाज अब सुनाई नहीं देगी जो रोज बच्चों को सही रास्ता दिखाती थी। उनके जाने के बाद स्कूल ने सिर्फ एक उप-प्राचार्य नहीं खोया, बल्कि एक ऐसा इंसान खो दिया जिसने अपने काम से हजारों बच्चों के भविष्य को दिशा दी।

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