रांची। झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। सोमवार को उद्योगपति और पूर्व राज्यसभा सांसद परिमल नथवाणी ने अपना नामांकन पत्र दाखिल कर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी।

नामांकन के दौरान भाजपा के कई विधायक उनके साथ विधानसभा पहुंचे। झरिया से भाजपा विधायक रागिनी सिंह समेत अन्य नेताओं की मौजूदगी ने उनके प्रति भाजपा के समर्थन के संकेत और मजबूत कर दिए। विधानसभा में नथवाणी को लेकर हटिया विधायक नवीन जायसवाल पहुंचे।
भाजपा के समर्थन से मजबूत हुई दावेदारी
परिमल नथवाणी झारखंड से वर्ष 2008 और 2014 में राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। वर्तमान में वे आंध्र प्रदेश से राज्यसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इस बार वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे हैं। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक भाजपा ने अपना आधिकारिक उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है और नथवाणी को समर्थन देने की रणनीति बनाई है।

बताया जा रहा है कि भाजपा के साथ-साथ सहयोगी दलों जदयू, लोजपा और आजसू के विधायकों को भी उनके प्रस्तावक बनने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में उनकी दावेदारी काफी मजबूत मानी जा रही है।
नामांकन से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और परिमल नथवाणी की मुलाकात भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी रही। हालांकि दोनों पक्षों ने इसे केवल शिष्टाचार भेंट बताया है।

वहीं JMM ने स्पष्ट कर दिया है कि वह नथवाणी के प्रस्तावक की भूमिका में नहीं है। बावजूद राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नथवाणी के चाहने वाले झामुमो में भी हैं। कारण कि झारखंड के लिए उनका कार्यकाल अच्छा रहा है।
दूसरी ओर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के मीडिया सलाहकार प्रणव झा को मैदान में उतारा है।

महागठबंधन के पास विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल है, लेकिन कांग्रेस के विधायकों को एकजुट बनाए रखना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि क्रॉस वोटिंग होती है तो चुनाव के नतीजों पर इसका असर पड़ सकता है।

झारखंड विधानसभा में कुल 81 सदस्य हैं। राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान 18 जून को होना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि परिमल नथवाणी को भाजपा और उसके सहयोगी दलों का पूरा समर्थन मिलता है, तो उनकी जीत की संभावनाएं काफी बढ़ सकती हैं। उन्हें जीत के लिए केवल कुछ अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी।

नामांकन प्रक्रिया के साथ ही राज्यसभा चुनाव के लिए रा…
नामांकन करना और जीतना दोनों अलग है। भाजपा के ही सभी विधायकों का भी उन्हें समर्थन मिलेगा, यह भी कहा नहीं जा सकता। स्थानीयता और राज्य के मुद्दे पर भी हैं। भाजपा ने किसी दलित को राज्यसभा नहीं भेजा?
सुप्रियो भट्टाचार्य, महासचिव, झामुमो
मैं पुराना झारखंडी हूं। मुझे विश्वास है कि मुझे जीत मिलेगी। सत्तापक्ष का भी साथ मिलेगा। मेरे दो कार्यकाल के काम को पूरा झारखंड देखा है। सबसे लेंगे सहयोग। सबसे मिलना आवश्यक है। हमने झारखंड के लिए जो काम किया है, उसके भरोसे वोट मांगेगे।
-परिमल नथवाणी, राज्यसभा प्रत्याशी, झारखंड

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