
अदालत ने सुनवाई के दौरान रिकॉर्ड पर पाया कि 22 जुलाई 2025 के आदेश का अब तक अनुपालन नहीं किया गया है. इस मामले में प्रशासक ने पूर्व में टाउन प्लानर और लीगल सेक्शन से संबंधित व्यवस्था जल्द लागू करने का आश्वासन कोर्ट को दिया था. रिकॉर्ड के अनुसार, पूर्व में 12 नवंबर, 3 दिसंबर और 9 दिसंबर 2025 को भी समय दिया गया था. इसके बाद इस वर्ष 24 और 30 मार्च 2026 को भी मौके दिए गए, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ. इसी ढुलमुल रवैये को देखते हुए अदालत ने अब कड़ा रुख अख्तियार किया है.
सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि सुप्रीम कोर्ट ने 12 दिसंबर 2025 के एक आदेश पर रोक लगाई है, लेकिन हाईकोर्ट के बाकी आदेश अब भी प्रभावी हैं. महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट को इस मुख्य मामले की सुनवाई जारी रखने का निर्देश दिया है. इसी आलोक में हाईकोर्ट ने निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए अब सीधे प्रशासक को जवाबदेह ठहराया है.
अगली सुनवाई 28 अप्रैल को
प्रार्थी गौरव कुमार बेसरा की ओर से अधिवक्ता सोनम ने पक्ष रखते हुए कोर्ट को निगम की ओर से हो रही देरी से अवगत कराया. मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने अब अगली सुनवाई की तिथि 28 अप्रैल निर्धारित की है. इस दिन नगर निगम के प्रशासक को कोर्ट में मौजूद रहकर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी.

