
रांचीः वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम और यूके की यात्रा के क्रम में विश्व स्तर पर ऊर्जा क्षेत्र के अग्रणी निवेशकों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और ऊर्जा के क्षेत्र में नीति-निर्माण करने वाले संस्थानों के साथ झारखंड राज्य का संवाद कायम होगा. इसमें सहभागी बनने के लिए जहां मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में सरकारी अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल दावोस पहुंच चुका है.
वहीं इस शिष्टमंडल में शामिल झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष और महासचिव भी शनिवार को रांची एयरपोर्ट से भाया दिल्ली दावोस के लिए रवाना हुए. इस मौके पर राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने चैंबर अध्यक्ष आदित्य मलहोत्रा और महासचिव रोहित अग्रवाल को बधाई दी.उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के शिष्टमंडल में पहली बार झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स को भी शामिल किया गया है जो बेहद ही स्वागतयोग्य है इसका लाभ राज्य को मिलेगा. इस मौके पर चैंबर अध्यक्ष आदित्य मलहोत्रा ने कहा कि झारखंड को विकसित राज्य बनाने के लिए मुख्यमंत्री के द्वारा यह जो पहल की गई है. इससे यह उम्मीद की जा सकती है कि राज्य के विकास में यह यात्रा मिल का पत्थर साबित होगा. इस मौके पर चैंबर के महासचिव रोहित अग्रवाल ने कहा कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम सम्मेलन से बहुत कुछ सीखने का मौका मिलेगा. जिसे अपने राज्य में जमीन पर उतारने का काम होगा. जाहिर तौर पर इस दौरान झारखंड में निवेश को बढ़ावा देने के लिए हम अपने संसाधनों की जानकारी दुनिया के समक्ष रखेंगे.वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम सम्मेलन में झारखंड में उपलब्ध संसाधनों से ना केवल दुनिया को अवगत कराया जाएगा. बल्कि यहां विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए प्राकृतिक स्रोतों से उत्पादित की जाने वाली ऊर्जा, ग्रिड आधुनिकीकरण, ऊर्जा भंडारण, स्वच्छ ईंधन और औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन से जुड़े निवेश अवसरों को बताया जाएगा. दावोस और यूनाइटेड किंगडम में अपनी सहभागिता के माध्यम से, झारखंड एक मॉडल प्रस्तुत करने जा रहा है जो विश्वसनीय, समावेशी और वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक होगा. राज्य में प्राकृतिक स्रोतों से उत्पादित की जाने वाली ऊर्जा की व्यापक संभावना है. यहां के प्रचुर प्राकृतिक संसाधन राज्य को एनर्जी ट्रांजिशन की दिशा में अग्रणी बनाने की अपार संभावनाएं हैं.
दावोस की यात्रा पर जा रहा प्रतिनिधिमंडल यह बताएगा कि भारत ने जो नेट-जीरो टारगेट और ग्रीन इकोनॉमी की दिशा में दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाने का जो संकल्प लिया है उसे झारखंड दोहराएगा. झारखंड प्रकृति के साथ सामंजस्य में विकास की बात को अपने इस पहल से पुख्ता भी करेगा. यह दृष्टिकोण न सिर्फ भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं में झारखंड की ऐतिहासिक भूमिका होगी बल्कि एक टिकाऊ वैश्विक भविष्य के प्रति राज्य की जिम्मेदारी को भी दर्शाएगा.

