
रांची: प्रोजेक्ट भवन स्थित झारखंड मंत्रालय के बाहर मंगलवार को झारखंड सचिवालय सेवा संघ के कर्मियों ने अपनी मांग को लेकर मानव श्रृंखला बनाकर प्रदर्शन किया. सचिवालय सेवा संघ की नाराजगी कैडर रिव्यू को लेकर बनाई गई विशेष कमेटी को लेकर थी. संघ के पदाधिकाकारियों ने कहा कि पहले से ही सचिवालय में पदों की कमी है और यह कमेटी उसे और कम करने के लिए बनाई गई है, जो ठीक नहीं है. इसलिए इसे तत्काल भंग किया जाए.
सचिवालय कर्मियों ने कहा कि सचिवालय सेवा के पद को घटाने की साजिश चल रही है. ये राज्य हित में नहीं है. इसे लेकर उच्च शिक्षा एवं शहरी विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने आंदोलित सचिवालय कर्मियों से वार्ता की. उन्होंने संघ के दो सदस्यों को कमेटी के सदस्य बनाने, कमेटी की अनुशंसा को सीधे लागू नहीं करने का आश्वासन दिया. जिसके बाद सचिवालय कर्मी आंदोलन को स्थगित कर दिया.
सचिवालय सेवा संघ के अध्यक्ष रितेश कुमार और महासचिव राजेश सिंह ने कहा कि झारखंड सचिवालय सेवा के पुनरीक्षण के लिए गठित समिति का गठन सही प्रक्रिया के तहत नहीं किया गया है. यह समिति केंद्र सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के 30 सितंबर 2022 के एक पत्र के आधार पर बनाई गई है. जबकि वह पत्र केवल परामर्शात्मक है और केंद्र में भी अभी तक लागू नहीं किया गया है.
संघ के अध्यक्ष ने बताया कि गठित समिति के Terms of Reference (ToR) भी कई स्तर पर विरोधाभासी है. इसमें संबंधित स्टेकहोल्डर्स, विभागों और सेवा के अधिकारियों से कोई व्यापक परामर्श नहीं लिया गया. इससे यह प्रक्रिया एकतरफा प्रतीत होता है. इसी वजह से सचिवालय सेवा के पदाधिकारियों में असंतोष बढ़ा है.
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि सचिवालय सेवा में पदों की पहले से ही भारी कमी है. जिससे प्रोन्नति के अवसर प्रभावित हो रहे हैं. कई पद लंबे समय से खाली पड़े हैं. लेकिन योग्य अधिकारियों को प्रोन्नति नहीं मिल पा रही है. संघ ने कार्मिक विभाग पर प्रोन्नति प्रक्रिया को बाधित करने और सेवा के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है.

