
राँची। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत आयोजित भावना योग शिविर में मुनिश्री 108 प्रमाणसागर जी महाराज ने साधकों को आन्तरिक शुद्धि, आत्म-जागरण एवं करुणा –मैत्री की भावनाओं को जीवन में विकसित करने का संदेश दिया। शिविर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, मुख्य अतिथि राँची के सांसद सह रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, राँची के विधायक सी पी सिंह, पार्षद सुनील यादव (मामा) , पार्षद परमजीत सिंह (टिंकू), चैंबर के पूर्व अध्यक्ष अरुण बुधिया, मारवाड़ी सहायक समिति के पदाधिकारी, गुरू सिंह सभा के पदाधिकारी, मारवाड़ी सम्मेलन के पदाधिकारी, गुजराती समाज, ओसवाल संघ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारी, नागरमल मोदी सेवा सदन के पदाधिकारी और बाहर से आए अतिथिगण ने अपनी उपस्थिति दर्ज की। जैन समाज के अध्यक्ष प्रदीप बाकलीवाल ने सांसद महोदय का एवं मंत्री जीतेन्द्र छाबड़ा ने विधायक का सम्मान किया,
भावना योग शिविर
मुनिश्री ने कहा कि “भावना योग वह साधना है जो मन के विकारों को गला कर मनुष्य को स्वयं के वास्तविक स्वरूप से जोड़ती है। साधक जब मैत्री, प्रमोद, करुणा और मध्यास्थ भावनाओं को अपनाता है, तब जीवन सहज, शांत और निर्मल बन जाता है।” दैनिक जीवन की उलझनों, तनावों और मनोविकारों का समाधान बाहर नहीं, बल्कि भीतर की साधना में है। आप जैसी भावना रखोगे आपका शरीर उसी भावना के अनुरूप रहेगा,भावना योग व्यक्ति को आत्म- केन्द्रित करता है, जिससे क्रोध, लोभ, अहंकार जैसे दोष स्वतः क्षीण होने लगते हैं। जब क्रोध आए तो अपने आप से दोहराए मैं शान्त हूं, मैं सज़ग हूं। दुनिया के किसी भी बीमारी के लिए भावना योग सहायक हैं। ऐसे कई उदाहरण शामिल है जैसे डायलसिस का उदाहरण एक व्यक्ति जिसकी सफ्ताह में दो बार डायलिसिस होती थी अब जब से भावना योग का सम्पर्क मिला महीने में एक ही बार होती हैं। एक व्यक्ति के सीने में पानी भरने से एक फेफड़ा छोटा हो गया पूरे देश के कई बड़े डॉक्टर्स से चिकित्सा परामर्श लेने के बाद भावना योग नियम से किया, परिणाम सत्तर प्रतिशत फायदा हो गया चिकित्सक भी अचंभित हो गए। मुनिश्री ने इसकी विधि के बारे में विस्तार से बताया। शिविर के दौरान मुनिश्री ने उपस्थित भक्तों को धीरे–धीरे संयम, समता और आत्म-प्रेरणा की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि पंचकल्याणक जैसे पावन अवसर आत्म-शोधन और अध्यात्म की ओर लौटने की सर्वोत्तम प्रेरणा देते हैं। कार्यक्रम के अंत में सामूहिक मंगल भावना गीत मंगल मंगल होय जगत में, सब मंगलमय होय, इस धरती के हर प्राणी का मन मंगलमय होय का गान किया गया।
जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने शांति और आत्म– अनुभूति का विशेष अनुभव किया।
ज्ञान कल्याणक आत्मा की अनंत शक्तियों के जागरण का प्रतीक है
मुनिश्री 108 प्रमाणसागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में सम्पन्न ज्ञान कल्याणक के दौरान भगवान के केवलज्ञान प्रकट होने के दिव्य क्षणों का विधान अत्यंत संयम, शुद्धि और मंत्रोच्चार के बीच सम्पन्न हुआ। मुनिश्री ने कहा कि “ज्ञान कल्याणक आत्मा की अनंत शक्तियों के जागरण का प्रतीक है। जब मोह, अज्ञान और अविद्या के आवरण हटते हैं, तब आत्मज्ञान का सूर्य उदित होता है।” मुनिश्री ने सभी से आह्वान किया कि ज्ञान कल्याणक का संदेश केवल उत्सव का नहीं, बल्कि अंदर छिपे ज्ञान को प्रकट करने का आह्वान है। मनुष्य जब सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र की ओर बढ़ता है, तभी जीवन सार्थक होता है। ज्ञान कल्याणक की क्रिया के पश्चात् दो नव दीक्षार्थी जिनकी जैनेश्वरी दीक्षा आगामी 18 अप्रैल को पारसनाथ में होगी, दीक्षा पूर्व राँची समाज ने अपर बाज़ार जैन मन्दिर से उनकी बिंदोरी निकाली जो बिरसा मुंडा फन पार्क तक निकली जहां उनकी गोद भराई की रश्म की गई

