मुंबई: देश के दिग्गज कारोबारी गौतम अडानी का समूह अब भारतीय आसमान पर अपनी धाक जमाने के लिए तैयार है। अडानी एंटरप्राइजेज ने केंद्र सरकार द्वारा निजीकरण के लिए प्रस्तावित सभी 11 एयरपोर्ट के लिए आक्रामक रूप से बोली लगाने का फैसला किया है। समूह की यह रणनीति उसके 11 बिलियन डॉलर (करीब 91,000 करोड़ रुपये) के विशाल निवेश वाले ‘एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर’ विस्तार प्लान का हिस्सा है। इस कदम के साथ अडानी समूह भारत का सबसे बड़ा एयरपोर्ट ऑपरेटर बनने की अपनी स्थिति को और मजबूत करना चाहता है।
केंद्र सरकार की योजना साल 2047 तक देश में एयरपोर्ट की संख्या 163 से बढ़ाकर 400 करने की है। इसी कड़ी में अमृतसर, वाराणसी और अन्य महत्वपूर्ण शहरों के 11 हवाई अड्डों को लंबी अवधि के लिए लीज पर देने की प्रक्रिया शुरू की गई है। अडानी एयरपोर्ट्स होल्डिंग्स के डायरेक्टर जीत अडानी ने स्पष्ट कर दिया है कि समूह इन सभी अवसरों को भुनाने के लिए तैयार है। फिलहाल समूह 7 प्रमुख एयरपोर्ट्स का प्रबंधन संभाल रहा है, और नए अधिग्रहणों के बाद यह संख्या 18 तक पहुंच सकती है।
अडानी समूह के लिए इस महीने एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ने वाली है। मुंबई के पास सिडको के साथ पार्टनरशिप में तैयार ‘नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ अपनी सेवाएं शुरू करने जा रहा है। जीत अडानी के मुताबिक, इस नए एयरपोर्ट को एक आम भारतीय यात्री की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यहां की सेवाएं न केवल विश्वस्तरीय होंगी, बल्कि इन्हें किफायती (Affordable) रखने पर भी खास जोर दिया गया है। पैसेंजर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए यहां अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
भारतीय एविएशन मार्केट में इस समय अडानी ग्रुप और जीएमआर (GMR) ग्रुप के बीच कड़ी टक्कर है। जहां जीएमआर यात्रियों की संख्या (पैसेंजर हैंडलिंग) के मामले में सबसे बड़ा ऑपरेटर है, वहीं अडानी ग्रुप संचालित किए जा रहे एयरपोर्ट्स की संख्या के मामले में तेजी से आगे निकल रहा है। सरकार के नए विनिवेश प्लान के बाद, अडानी ग्रुप की यह ‘आक्रामक बोली’ पूरे एविएशन सेक्टर का समीकरण बदल सकती है।


