झारखंड सरकार ने सरकारी निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाले बालू और अन्य लघु खनिजों की आपूर्ति व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है. अब राज्य में किसी भी सरकारी निर्माण कार्य (सड़क, भवन आदि) के लिए बालू केवल आधिकारिक चालान के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकेगा. ‘झारखंड लघु खनिज समनुदान नियमावली 2004’ में संशोधन कर इस नए प्रावधान को लागू कर दिया गया है. खान निदेशालय ने सभी जिलों को संशोधित नियमावली भेजकर इसके अनुरूप कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.: नई नियमावली के लागू होने से अब सरकारी ठेकेदारों को मिलने वाली विशेष छूट खत्म कर दी गई है. पहले सरकारी निर्माण के लिए ठेकेदार केवल रॉयल्टी का दोगुना भुगतान (लगभग 380 रुपये प्रति 100 CFT) करके कहीं से भी बालू उठा लेते थे. लेकिन अब ठेकेदारों को बालू घाट के डीलर से उसी बाजार दर पर बालू खरीदना होगा, जिस पर आम जनता खरीदती है. डीलर द्वारा जारी चालान के बिना बालू का उठाव अवैध माना जाएगा.
अवैध उठाव पर भारी जुर्माने का प्रावधान
झारखंड सरकार ने अवैध बालू के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए दंडात्मक कार्रवाई को बेहद सख्त कर दिया है. यदि बिना चालान के एक ट्रैक्टर बालू या गिट्टी भी पकड़ी जाती है, तो 5 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है. बिना वैध चालान के पाए जाने वाले किसी भी लघु खनिज को अब पूरी तरह से अवैध करार दिया जाएगा. खान विभाग द्वारा नियमावली में इस बदलाव के पीछे दो प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं. इसके मुताबिक विभाग को सूचना मिली थी कि सरकारी काम के नाम पर ठेकेदार भारी मात्रा में बालू उठाकर उसे खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेच रहे थे. दूसरा ये कि बालू घाटों की नीलामी के बाद घाट संचालकों (डीलरों) ने शिकायत की थी कि उनकी लागत अधिक है, ऐसे में ठेकेदार कम कीमत (केवल रॉयल्टी) पर बालू कैसे ले सकते हैं.
महत्वपूर्ण बदलाव
अब ठेकेदारों को अधिकृत डीलर से ही लघु खनिज लेना होगा.
पहले 1.90 रुपये प्रति CFT रॉयल्टी की व्यवस्था थी, जो अब प्रभावी नहीं रहेगी.
सरकारी निर्माण और निजी निर्माण के लिए बालू की दरें अब एक समान होंगी.

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