
[11:44 pm, 20/2/2026] Sandeep Jain: रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन शुक्रवार को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार के अभिभाषण पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी बात रखना शुरू किया तो भारतीय जनता पार्टी के सभी विधायक सदन से वॉकआउट कर गए. इसपर भाजपा विधायकों और सत्ता पक्ष के विधायकों ने अपनी बातें रखी.
इस संबंध में पूर्व मंत्री और कोडरमा से भाजपा विधायक डॉ. नीरा यादव ने कहा कि हम लोग मुख्यमंत्री का भाषण सुनना चाहते थे. उनसे आग्रह भी किया था कि उनके मंत्रियों और सत्ताधारी दलों के विधायकों ने इधर-उधर की बात शुरू कर दी. हमें उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री कम से कम राज्य और राज्यवासियों के हित में अपनी बात रखेंगे. लेकिन मुख्यमंत्री भी अपने राज्य की उपलब्धियों या विकट स्थिति पर बात करने की जगह केंद्र सरकार की बुराई करते रहे तो कभी एआई समिट की खामियां गिनाते रहे.
नीरा यादव ने कहा कि झारखंड की स्थिति बेहद बुरी है. राज्य में भ्रष्टाचार चरम पर है और विधि-व्यवस्था की स्थिति बदतर है. ऐसे में इन सब मुद्दों पर बात करने की जगह मुख्यमंत्री केंद्र सरकार की खमियां गिना रहे थे. इसलिए हमलोग वॉकआउट कर बाहर आ गए. वहीं भाजपा विधायक उज्ज्वल दास ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संबोधन राज्यपाल के अभिभाषण पर केंद्रित नहीं था, बल्कि केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा जा रहा था. इसलिए उन लोगों ने सदन से वॉकआउट किया.
भाजपा विधायक सदन की बात सुनते, तो अच्छा रहता- हेमलाल
झामुमो के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री हेमलाल मुर्मू ने मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान भाजपा विधायकों द्वारा सदन से वॉकआउट कर जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनलोगों ने नेता, सदन की बात ही नहीं सुनी. ऐसा लगातार हो रहा है कि डिबेट में विपक्ष के विधायक होते हैं, लेकिन जब नेता सदन की ओर से जवाब दिया जाता है तो वह सदन से बाहर चले जाते हैं, यह ठीक नहीं है.
राज्य के श्रम मंत्री ने मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान भाजपा विधायकों के सदन से वॉकआउट करने और उनके द्वारा लगाए जा रहे आरोप पर कहा कि उनका काम ही है उल्टा-सीधा कहना. लेकिन जब उनके 17 वर्षों के कार्यकाल और वर्तमान सरकार के कार्यकाल की तुलना करेंगे तो आपको पता चलेगा कि हमारी सरकार ने राज्य के विकास और मजदूरों के हितों के लिए कितना काम किया है.

