
रांची, अंतरराष्ट्रीय साहित्य कला संस्कृति न्यास साहित्योदय के बैनर तले नववर्ष साहित्योत्सव सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें झारखण्ड साहित्य, कला, संस्कृति और समाज के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 40 लोगों को पलास सम्मान से सम्मानित किया गया। गीतायन कार्यक्रम में जो कुरुक्षेत्र नहीं जा सके थे उन्हें साहित्योदय रत्न से सम्मानित करते हुए गीतायन ग्रन्थ का वितरण किया गया। रांची से करीब 60 किलोमीटर दूर झारखण्ड का मिनी लंदन कहे जाने वाले मैकलुस्कीगंज की सुरम्य वादियों में स्थित वाई बी एन गुरूकुलम में आयोजित सम्मान समारोह का उद्घाटन संस्थापक अध्यक्ष पंकज प्रियम और गुरूकुलम के निदेशक डॉ चमन ठाकुर ने किया। पंकज प्रियम ने साहित्योदय के कार्यों की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि संस्था राष्ट्रचेतना, देशप्रेम, सत्य सनातन, साहित्य कला और संस्कृति के उत्थान में लगी है। साहित्योदय द्वारा वर्षभर कार्यक्रम के जरिये नई प्रतिभाओं को मंच देने का कार्य किया जा रहा है। इसके साथ ही नई पीढ़ी को प्राचीन साहित्य को सरल हिंदी में लेखन किया जा रहा है। अबतक 4 महाकाव्य ग्रन्थ जन रामायण, कृष्णायन, शिवायन और गीतायन का प्रकाशन हो चुका है। इस साल नारी शक्ति पर आधारित दुर्गायन ग्रन्थ का लेखन चल रहा है, जिसका विमोचन कामाख्या में होगा। बतौर मुख्यातिथि गुरूकुलम के निदेशक चमन ठाकुर ने साहित्योदय के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जिस तरह स्वच्छ साहित्य से ही स्वच्छ समाज का निर्माण होता है। कार्यक्रम में सभी ने गीत, संगीत, नृत्य, काव्य पाठ के बाद वनभोज और मैकलुस्कीगंज भ्रमण में भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ रजनी शर्मा चंदा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन राकेश रमण ने क़िया।

