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Home»धर्म-अध्याय»भारत के 8 मंदिर जहां प्रसाद में मिलता है चिकन-मटन और बिरयानी
धर्म-अध्याय

भारत के 8 मंदिर जहां प्रसाद में मिलता है चिकन-मटन और बिरयानी

जस्ट पोस्टBy जस्ट पोस्टDecember 26, 2025No Comments4 Mins Read0 Views
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भारत एक ऐसा देश है, जहां लोग देवी-देवताओं के प्रति गहरी आस्था रखते हैं और निर्भय होकर उनकी पूजा करते हैं। यह देश विविधताओं से भरा हुआ है और यहां हर कुछ किलोमीटर पर संस्कृति बदल जाती है और उस जगह की अपनी मान्यताएं होती हैं

बचपन से ही बहुत से लोगों ने यही सुना कि पूजा-पाठ, व्रत और भक्ति के रास्ते पर चलने वाले व्यक्ति को सात्विक यानी शाकाहारी भोजन करना चाहिए। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत के कुछ मंदिरों में प्रसाद के तौर पर नॉनवेज मिलता है। भारत में कई ऐसे मंदिर हैं, जहां देवी या लोकदेवता को मांसाहार अर्पित किया जाता है, इसके पीछे धार्मिक और सांस्कृतिक कारण हैं। आइए जानते हैं भारत के इन मंदिरों के बारे में जहां प्रसाद के तौर पर नॉनवेज मिलता है।

मुनियंडी स्वामी मंदिर, तमिलनाडु

तमिलनाडु के मदुरै जिले के एक छोटे से गांव वडक्कमपट्टी में स्थित मुनियंडी स्वामी मंदिर में भगवान मुनियादी (जो भगवान शिव के अवतार मुनिश्वरर के नाम से जाने जाते हैं) की पूजा की जाती है। यहां हर वर्ष तीन दिन का अनोखा वार्षिक उत्सव मनाया जाता है। इस मंदिर में प्रसाद के रूप में चिकन और मटन बिरयानी दी जाती है और लोग सुबह-सुबह बिरयानी खाने के लिए मंदिर में उमड़ पड़ते हैं।

विमला मंदिर, ओडिशा

देवी विमला या बिमला (दुर्गा का एक रूप) को दुर्गा पूजा के दौरान मांस और मछली का भोग लगाया जाता है। यह मंदिर ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर परिसर में है और इसे शक्तिपीठों में गिना जाता है। दुर्गा पूजा के दौरान, मंदिर के पवित्र मार्कंडा तालाब से मछली पकाई जाती है और देवी बिमला को चढ़ाई जाती है। इतना ही नहीं, इन दिनों सुबह से पहले बलि में चढ़ाए गए बकरे का मांस भी पकाकर देवी को अर्पित किया जाता है। ये दोनों व्यंजन बिमला परुसा या प्रसाद के रूप में उन लोगों में बांटे जाते हैं, जो बलि की पूरी प्रक्रिया को देखते हैं। खास बात यह है कि यह सब तब होता है जब भगवान जगन्नाथ के मुख्य द्वार खुले नहीं होते।

टारकुलहा देवी मंदिर, उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में स्थित टारकुलहा देवी मंदिर में हर साल खिचड़ी मेला लगता है। यह मंदिर लोगों की मनोकामना पूरी करने के लिए काफी प्रसिद्ध है। देशभर से लोग चैत्र नवरात्रि में यहां आते हैं और मनोकामना पूरी होने पर देवी को बकरा चढ़ाते हैं। इस मांस को मिट्टी के बर्तनों में पकाया जाता है और भक्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है।

पारसिनिक कडवु मंदिर, केरल

पारसिनिक कडवु मंदिर भगवान मुथप्पन को समर्पित है, जो विष्णु और शिव के अवतार माने जाते हैं और कलियुग में जन्मे हैं। दक्षिण भारत में इन्हें कई नामों से जाना जाता है और इनकी पूजा की जाती है। यहां अधिकतर प्रसाद में भुनी हुई मछली और ताड़ी भगवान मुथप्पन को चढ़ाई जाती है। माना जाता है कि ऐसा करने से मनोकामना पूरी होती है। यह प्रसाद बाद में मंदिर में आए भक्तों को दिया जाता है।

कालीघाट, पश्चिम बंगाल

यह देश के 51 शक्तिपीठों में से एक है और करीब 200 साल पुराना है। यहां अधिकतर भक्त देवी काली को प्रसन्न करने के लिए बकरा बलि चढ़ाते हैं। बलि चढ़ाने के बाद मांस के पकाया जाता है और फिर भक्तों को अर्पित किया जाता है।

कामाख्या मंदिर, असम

कामाख्या मंदिर, भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक है, यहां मां कामाख्या की पूजा तांत्रिक शक्तियों की प्राप्ति के लिए की जाती है। यह मंदिर असम के नीलाचल पहाड़ियों में स्थित है और प्राकृतिक सुंदरता से घिरा हुआ है। यहां देवी को दो प्रकार के भोग चढ़ाए जाते हैं, एक शाकाहारी और दूसरा मांसाहारी। हैरानी की बात यह है कि दोनों भोग बिना प्याज और लहसुन के बनाए जाते हैं। मांसाहारी भोग में बकरे का मांस होता है, जिसे मां कामाख्या को चढ़ाकर पकाया जाता है। कभी-कभी मछली की चटनी भी बनाई जाती है और यह भोग दोपहर 1 से 2 बजे के बीच देवी को चढ़ाया जाता है। इस दौरान मंदिर के मुख्य द्वार बंद रहते हैं।

तारापीठ, पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में स्थित तारापीठ मंदिर दुर्गा भक्तों के बीच काफी प्रसिद्ध है। यहां लोग देवी को मांस की बलि चढ़ाते हैं, जिसे भोग के रूप में शराब के साथ देवी को अर्पित किया जाता है। यह भोग बाद में भक्तों में बांटा जाता है।

दक्षिणेश्वर काली मंदिर, पश्चिम बंगाल

दक्षिणेश्वर काली मंदिर, एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है, जो देवी दुर्गा के भक्तों के बीच काफी लोकप्रिय है। इस मंदिर में देवी को भोग में मछली चढ़ाई जाती है, जिसे बाद में पूजा करने आए भक्तों में बांटा जाता है। हालांकि, इस मंदिर में किसी भी जानवर की बलि नहीं दी जाती।

Dakshineswar Kali Temple in West Bengal Kalighat in West Bengal Kamakhya Temple in Assam Muniyandi Swami Temple in Tamil Nadu Parassinikadavu Temple in Kerala Tarapith in West Bengal Tarkulaha Devi Temple in Uttar Pradesh Vimala Temple in Odisha कामाख्या मंदिर असम कालीघाट पश्चिम बंगाल टारकुलहा देवी मंदिर उत्तर प्रदेश तारापीठ पश्चिम बंगाल दक्षिणेश्वर काली मंदिर पश्चिम बंगाल पारसिनिक कडवु मंदिर केरल मुनियंडी स्वामी मंदिर तमिलनाडु विमला मंदिर ओडिशा
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