Close Menu
Just PostJust Post
  • आज की बड़ी खबरें
  • झारखंड
  • बिहार
  • देश
  • दुनिया
  • राजनीति
  • खेल
  • बिजनेस
  • मनोरंजन
  • धर्म-अध्याय
  • लेख
Facebook X (Twitter) Instagram
Just PostJust Post
Facebook X (Twitter) Instagram WhatsApp
  • होम
  • देश
  • दुनिया
  • राज्य
    • झारखंड
    • बिहार
  • राजनीति
  • बिजनेस
  • खेल
  • मनोरंजन
  • धर्म-अध्याय
  • लेख
Just PostJust Post
  • आज की बड़ी खबरें
  • झारखंड
  • बिहार
  • देश
  • दुनिया
  • राजनीति
  • खेल
  • बिजनेस
  • मनोरंजन
  • धर्म-अध्याय
  • लेख
Home»Uncategorized»राजश्री भी लड़ना चाहती हैं राज्यसभा चुनाव, दादी रूपी सोरेन से बताई मन की बात, कहा, फैसला बड़ों को लेना है
Uncategorized

राजश्री भी लड़ना चाहती हैं राज्यसभा चुनाव, दादी रूपी सोरेन से बताई मन की बात, कहा, फैसला बड़ों को लेना है

जस्ट पोस्टBy जस्ट पोस्टJune 2, 2026No Comments4 Mins Read18 Views
Facebook Twitter WhatsApp Pinterest LinkedIn Tumblr Email Telegram Threads Copy Link
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email Threads Telegram WhatsApp Copy Link

रांचीः झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल के बीच बीजेपी की नेता सीता सोरेन की बेटी राजश्री सोरेन ने भी राज्यसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की हैं.

इसके लिए उन्होंने अपनी दादी रूपी सोरेन और चाचा हेमंत सोरेन से मन की बात कही है. समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में राजश्री सोरेन ने खुलासा किया है कि उन्होंने चुनाव लड़ने की इच्छा जतायी है. कई लोगों ने इच्छा जाहिर की है, तो हमें भी लगा यह बात कहनी चाहिए. फैसला बड़ों को लेना है. हम छोटे हैं. अगर उन्हें लगता है कि मेरा और बड़ा होना बाकी है, तो वह भी अच्छा होगा.

राज्यसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताते हुए झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक अध्यक्ष तथा पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की पोती जयश्री सोरेन ने सामाचार एजेंसी से कहा, “मैं चुनाव लड़ना चाहती थी क्योंकि मैं अपनी मां के साथ इस क्षेत्र में आती-जाती रहती हूं… मेरी जनता के लिए काम करने की इच्छा है… मैंने सोचा कि मुझे अपनी इच्छा व्यक्त करनी चाहिए. मैंने दादी (रूपी सोरेन) से भी बात की है. अगर मुझे यह पद मिलता है, तो मैं जनता के लिए काम करूंगी…उनकी तरफ से प्रतिक्रिया अच्छी है…”

दुर्गा सोरेन की बेटी हैं

झामुमो के कद्दावर नेता रहे और शिबू सोरेन के बड़े पुत्र दिवंगत दुर्गा सोरेन की बेटी राजश्री सोरेन राजनीतिक तथा सामाजिक गतिविधियों में रूची रखती हैं. अपनी मां, पूर्व विधायक सीता सोरेन के साथ दुमका के गांवों में लोगों के बीच आती जाती रही हैं.

2024 में लोकसभा चुनाव से पहले सीता सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा छोड़ कर भाजपा में शामिल हो गई थीं. सीता सोरेन को भाजपा ने पहले दुमका लोकसभा सीट से चुनाव लड़ाया. इस चुनाव में वे मामूली वोटों के अंतर से हार गईं. इसके बाद जामताड़ा से विधानसभा चुनाव भी हार गईं.

सीता सोरेन ने भी राज्यसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर कर चुकी हैं.

अभी हेमंत ने पत्ते नहीं खोले हैं

सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अब तक पत्ते नहीं खोले हैं. जबकि सत्तारूढ़ दलों के अलावा बीजेपी की निगाहें हेमंत सोरेन की रणनीति और निर्णय पर टिकी है.

उधर ओडिशा से झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं की मांग अंजनी सोरेन को राज्यसभा भेजने की है. झामुमो के कार्यकर्ता रांची आकर हेमंत सोरेन से मिलकर इस मामले में मांग पत्र भी सौंपा है.

शिबू सोरेन की बेटी अंजनी सोरेन ओडिशा में झारखंड मुक्ति मोर्चा की प्रमुख नेतृत्वकर्ता के तौर पर काम करती रही हैं.

बीते शुक्रवार को कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के राजू और तेलंगाना के डिप्टी सीएम मल्लू भट्टी विक्रमार्का ने हेमंत सोरेन से मुलाकात कर एक सीट पर दावेदारी की है. उधर भाजपा ने संख्याबल नहीं रहने के बाद भी चुनाव लड़ने की घोषणा की है. इससे चुनाव का रोमांच और बढ़ गया है.

18 जून, 2 सीटें और अंकगणित

18 जून को झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव होने हैं. एक सीट झामुमो के संस्थापक अध्यक्ष शिबू सोरेन के निधन से खाली हुई है. दूसरी सीट पर भाजपा के दीपक प्रकाश का कार्यकाल समाप्त होने वाला है.

81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए 28 विधायकों के वोट की जरूरत होगी.

सत्ताधारी दलों में झामुमो के पास 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और भाकपा माले के 2 विधायक (कुल 56) हैं. अंकगणित के लिहाज से दोनों सीट सत्तारूढ़ दल जीत सकते हैं.

राजद के वोटों का फैसला तेजस्वी यादव लेंगे और भाकपा माले के दो वोटों को लेकर पार्टी महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य का निर्णय अहम होगा.

वैसे एक सीट पर झामुमो की जीत कंफर्म है. झामुमो के पास पर्याप्त संख्याबल है. कांग्रेस को यह लगता है कि सत्ता में सहयोगी दलों के समर्थन से उसकी नैया पार हो सकती है.

Share. Facebook Twitter Email Threads Telegram WhatsApp Copy Link
जस्ट पोस्ट
  • Website

Related Posts

मोदी सरकार के 12 साल उपलब्धियां नहीं 24 गबनों का कार्यकाल रहा : सुप्रियो भट्टाचार्य

June 29, 2026

राम और हनुमान का चरित्र त्याग, भक्ति और आदर्श का शिखर: मुनि श्री सुयश सागर जी

June 29, 2026

दिल्ली में राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में शामिल हुई मंत्री दीपिका पांडेय सिंह

June 29, 2026

खनन संविदाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु क्षमता संवर्धन कार्यक्रम का आयोजन

June 29, 2026

बुढ़मू में महिला ने फांसी लगाकर की आत्महत्या

June 29, 2026

मानव अधिकार और समावेशी विकास पर राष्ट्रीय मंथन: ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना से ही बनेगा समृद्ध भारत: न्यायमूर्ति विद्युत रंजन सारंगी

June 29, 2026
Add A Comment
Leave A Reply Cancel Reply

अभी-अभी

मोदी सरकार के 12 साल उपलब्धियां नहीं 24 गबनों का कार्यकाल रहा : सुप्रियो भट्टाचार्य

June 29, 2026

राम और हनुमान का चरित्र त्याग, भक्ति और आदर्श का शिखर: मुनि श्री सुयश सागर जी

June 29, 2026

दिल्ली में राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में शामिल हुई मंत्री दीपिका पांडेय सिंह

June 29, 2026

खनन संविदाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु क्षमता संवर्धन कार्यक्रम का आयोजन

June 29, 2026

बुढ़मू में महिला ने फांसी लगाकर की आत्महत्या

June 29, 2026
© 2026 Just Post. Designed by Launching Press.
  • About Us
  • Contact Us
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Terms and Conditions
  • AdSense Policy

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.