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Home»Uncategorized»लापरवाही से हुई मरीज की मौत पर दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, दर्ज होगी प्राथमिकी
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लापरवाही से हुई मरीज की मौत पर दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, दर्ज होगी प्राथमिकी

जस्ट पोस्टBy जस्ट पोस्टMay 7, 2026No Comments4 Mins Read24 Views
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स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव ने सभी जिला के सिविल सर्जन को सीएचसी-पीएचसी का निरीक्षण करने का दिया निर्देश

राँची: झारखंड में डॉक्टर, नर्स या एंबुलेंस चालक की लापरवाही से किसी मरीज की मौत होती है तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. दोषियों को चिन्हित करके उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी. यह निर्देश झारखंड सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने दिया है. उन्होंने गुरुवार को राज्य के सभी सिविल सर्जनों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक की.

बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, रिक्त पदों की बहाली, अस्पतालों की व्यवस्था और हाल की घटनाओं पर गंभीर चर्चा हुई. उन्होंने स्पष्ट कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी.

बैठक की शुरुआत हाल में विभिन्न जिलों में हुई घटनाओं की समीक्षा से हुई. सरायकेला में मां-बेटी की मौत के मामले में जांच जारी होने की जानकारी दी गई. वहीं गोड्डा मामले में संबंधित सिविल सर्जन ने बताया कि ममता वाहन चालक, मरीज को ले जाने वाले सहिया और अस्पताल संचालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है तथा सहिया की गिरफ्तारी हो चुकी है. इस पर अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए और किसी भी दोषी को बचाया न जाए.

इस दौरान रांची में मरीज की मौत के मामले की भी समीक्षा की गई. विभाग ने सभी जिलों को ऐसे मामलों की गंभीरता से जांच कर त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया. हजारीबाग में बिना सामान आपूर्ति किए भुगतान किए जाने के मामले में संबंधित सप्लायर को ब्लैकलिस्ट करने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई के आदेश दिए गए. साथ ही सभी सिविल सर्जनों को पिछले दो वर्षों का ऑडिट कर कमियों को दूर करने का निर्देश दिया गया.

सभी सीएचसी और पीएचसी का निरीक्षण करके खामियां दूर करने का निर्देश:
अपर मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री अस्पताल संचालन एवं रखरखाव योजना की समीक्षा करते हुए सभी सिविल सर्जनों को सीएचसी और पीएचसी स्तर तक जाकर निरीक्षण करने और अस्पतालों की वास्तविक स्थिति की तस्वीरें अपलोड करने को कहा. उन्होंने आईसीयू, सीसीयू, इमरजेंसी सेवाओं और बेड की उपलब्धता की भी समीक्षा करने का निर्देश दिया.

एनएचएम के तहत पारा मेडिकल स्टाफ और तकनीशियन की बहाली को लेकर उन्होंने कहा कि दो माह के भीतर सभी रिक्त पद भरने होंगे. जिलावार सूची तैयार कर दी गई है और राज्य स्तर से जेएसएससी को रिक्विजिशन भेजने का निर्देश दिया गया है.

बार-बार इस्तीफा देने वाले डॉक्टर होंगे ब्लैकलिस्टेड:
अपर मुख्य सचिव ने बीड श्रेणी के डॉक्टरों की उपस्थिति पर भी सख्त रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि जो डॉक्टर अपने निर्धारित कार्यस्थल पर नहीं हैं, उनकी तत्काल रिपोर्ट की जाए. साथ ही मनमाने तरीके से ट्रांसफर नहीं करने और नियुक्ति के बाद दो बार इस्तीफा देने वाले डॉक्टरों को ब्लैकलिस्ट करें.

बैठक में मुख्यमंत्री डिजिटल हेल्थ योजना और एबीडीएम के तहत सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को इंटरनेट से जोड़ने, कंट्रोल एंड कमांड सेंटर स्थापित करने तथा सीसीटीवी लगाने की योजना की भी समीक्षा हुई. अधिकारियों ने बताया कि सभी सीएचसी और पीएचसी में कंप्यूटर लगाए जाएंगे और एआई आधारित इंटीग्रेटेड डैशबोर्ड विकसित किया जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और दवा प्रबंधन को बेहतर बनाया जा सके.


आईसीयू बनाने के लिए जिलों में 2 हजार वर्गफीट जमीन की जरुरत:
डीआईसी डॉ सिद्धार्थ सान्याल ने आईसीयू निर्माण की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रत्येक जिले में न्यूनतम 2000 वर्गफीट स्थान उपलब्ध होना आवश्यक है. उन्होंने बताया कि कुछ जिलों ने केवल 600 से 900 वर्गफीट जमीन उपलब्ध कराने की सूचना दी है, जो पर्याप्त नहीं है. उन्होंने वेंटिलेटर छोड़कर अन्य आवश्यक उपकरणों की खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिया.

बैठक के अंत में एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने 15वें वित्त आयोग और पीएम-अभिम योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि कई जिलों में लैब निर्माण का कार्य शुरू नहीं हुआ है. उन्होंने पुराने लैब भवनों को मॉडिफाई कर शीघ्र कार्य शुरू करने का निर्देश दिया.

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