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Home»Uncategorized»गोपाल मिश्रा आई.एफ.डब्ल्यू.जे. के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित, मिला एकमत जनादेश
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गोपाल मिश्रा आई.एफ.डब्ल्यू.जे. के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित, मिला एकमत जनादेश

जस्ट पोस्टBy जस्ट पोस्टApril 6, 2026No Comments3 Mins Read4 Views
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नई दिल्ली, 6 अप्रैल 2026: इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (आई.एफ.डब्ल्यू.जे.) ने आज गोपाल मिश्रा को एकमत रूप से अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया। यह निर्वाचन संघ के 27 राज्यों में से 14 राज्यों के निर्वाचक मंडल द्वारा किया गया। चुनाव परिणामों की घोषणा जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ दिल्ली (जे.यू.डी.) के कार्यालय, बी-35, निज़ामुद्दीन, नई दिल्ली में आई.एफ.डब्ल्यू.जे. के संविधान की धारा 49 के तहत की गई।

गोपाल मिश्रा स्वर्गीय डॉ. के. विक्रम राव का स्थान लेंगे। डॉ. राव 11 पुस्तकों के लेखक थे। वेतन बोर्ड और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य के रूप में उन्होंने 27 राज्यों के पत्रकारों के लिए बेहतर वेतन और काम करने की शर्तें सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई। 1975 के आपातकाल में प्रेस सेंसरशिप का विरोध करने के कारण उन्होंने 13 महीने जेल काटी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में विज्ञान भवन में उनके इस साहस का सम्मान किया था। डॉ. राव का 12 मई 2025 को निधन हो गया था। गोपाल मिश्रा का चुनाव संघ के सबसे प्रतिष्ठित नेता के निधन के बाद पहला नेतृत्व परिवर्तन है, जब आई.एफ.डब्ल्यू.जे. भारत के समाचार कक्षों में आर्थिक संकट और एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) के बढ़ते व्यवधान का सामना कर रहा है।

यह चुनाव प्रक्रिया सितंबर 2025 में राजस्थान के जोधपुर में शुरू हुई थी। चुनावी पेपरों की जाँच कॉमरेड संतोष चतुर्वेदी (उत्तर प्रदेश) मुख्य निर्वाचन अधिकारी, कॉमरेड सोमैया मामिदी (तेलंगाना) अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी और कॉमरेड मारूफ रज़ा (दिल्ली) अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा की गई।

आई.एफ.डब्ल्यू.जे. के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गोपाल मिश्रा ने कहा कि आज काम करने वाले पत्रकारों के सामने दो बड़ी चुनौतियाँ हैं। पहली, पारंपरिक विज्ञापन और राजस्व के पुराने तरीके खत्म होने से पैदा हुई आर्थिक अनिश्चितता। दूसरी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का बढ़ता दखल जो हर समाचार कक्ष का स्वरूप बदल रहा है और पत्रकारिता के अस्तित्व के लिए खतरा बन गया है। उन्होंने कहा कि संघ का पहला काम यह सुनिश्चित करना है कि बिना किसी बातचीत और उचित विकल्प के किसी पत्रकार की रोजी-रोटी किसी मशीन या एल्गोरिदम की वजह से न छीनी जाए। दूसरा काम यह है कि डिजिटल दौर में मेहनत की सही कीमत मिले, इसके लिए ठोस वेतन सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

घोषणा के अवसर पर उपस्थित आई.एफ.डब्ल्यू.जे. के वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्यों में उपाध्यक्ष उपेंद्र राठौड़, कोषाध्यक्ष रजत मिश्रा, सचिव पी. आनंदम, सचिव के. विश्वदेव राव, राज्य अध्यक्ष सलमान खान (मध्य प्रदेश) तथा जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ दिल्ली के अन्य सदस्य शामिल थे।

इस मौके पर ऑल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन (ए.आई.आर.एफ.) के महासचिव कॉमरेड शिवगोपाल मिश्रा भी उपस्थित थे। उन्होंने डॉ. विक्रम राव को भावभीनी श्रद्धांजलि दी और गोपाल मिश्रा को आई.एफ.डब्ल्यू.जे. का अध्यक्ष बनने पर बधाई दी। उन्होंने कामना की कि गोपाल मिश्रा डॉ. राव के दिखाए रास्ते पर चलते हुए संघ को मजबूती दें।
गोपाल मिश्रा ने द टाइम्स ऑफ इंडिया और नेशनल हेराल्ड जैसे अखबारों में वरिष्ठ संपादकीय पदों पर काम किया है। उन्होंने भारत का पहला इंटरनेट समाचार पोर्टल शुरू किया। पायनियर एम्प्लॉइज यूनियन की स्थापना की, जिसे पूर्व राष्ट्रपति वी.वी. गिरि ने मान्यता दी थी। साथ ही, वे दशकों से आई.आई.एम.सी. में पढ़ा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि आई.एफ.डब्ल्यू.जे. की स्थापना 1950 में नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुई थी। यह गुटनिरपेक्ष देशों में सबसे बड़ा पत्रकार संगठन है। इसके 47 देशों में द्विपक्षीय संबंध हैं। यही वह संगठन है जिसके प्रयासों से 1956 में पत्रकारों के काम करने की शर्तों पर देश का पहला संसदीय कानून बना था।

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