
रांची।राजधानी रांची में शुक्रवार को आस्था और भक्ति का अद्भुत सैलाब उमड़ पड़ा। अवसर था श्री दिगंबर जैन पंचायत के तत्वावधान में सर्कुलर रोड स्थित बिरसा मुंडा जेल पार्क में आयोजित पांच दिवसीय पंचकल्याणक महोत्सव के तीसरे दिन भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक का।
इस मौके पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में पीतल के रथ पर भगवान जीनेंद्र देव की प्रतिमा को विराजमान किया गया था। तपती धूप और गर्म सड़क के बावजूद भक्त नंगे पांव भगवान के जयकारे लगाते हुए रथ को आगे बढ़ा रहे थे।
शोभायात्रा में बैंड-बाजे, बग्गी और भजन मंडली भी शामिल थी। भजन कलाकार हेमंत सेठी ने अपनी टीम के साथ “जन्मे आदिनाथ बधाई हो…” जैसे भजनों की प्रस्तुति दी, जिस पर भक्त तालियां बजाते और नृत्य करते नजर आए। पूरा माहौल भक्ति के रंग में रंग गया।
जगह-जगह विभिन्न संस्थाओं द्वारा शोभायात्रा का स्वागत शीतल पेय, जल, जूस और पुष्प वर्षा के साथ किया गया। प्रातः 7:14 बजे भगवान के जन्मोत्सव के अवसर पर इंद्र का सिंहासन कंपायमान होने की मान्यता के साथ मंगल ध्वनियां, ढोल-नगाड़े और पारंपरिक नृत्य से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
इन्होंने लिया आशीर्वाद
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सह सांसद आदित्य साहू, नागेंद्र त्रिपाठी, कर्मवीर सिंह, बालमुकुंद सहाय, दीपक बंका, योगेंद्र सिंह, पूर्व उपमहापौर संजीव विजयवर्गीय सहित हजारीबाग, कुनकुरी, कोडरमा और देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने मुनि श्री का आशीर्वाद प्राप्त किया।
सभी का स्वागत समाज के अध्यक्ष प्रदीप बाकलीवाल एवं मंत्री जितेंद्र छाबड़ा ने किया।*
ड्रोन से रत्न वर्षा बनी आकर्षण का केंद्र
भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक के अवसर पर आकाश में इंद्र के स्वरूप वाले ड्रोन के माध्यम से रत्नों की वर्षा का दृश्य प्रस्तुत किया गया, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा।
—
जन्म का मूल्य समझो, जीवन को धर्ममय बनाओ” — मुनि श्री प्रमाण सागर जी
मुनि श्री 108 प्रमाण सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि जन्म केवल शरीर का नहीं, बल्कि चेतना के जागरण का भी होता है। भगवान आदिनाथ का जन्म हमें अज्ञान को मिटाकर सत्य, अहिंसा और संयम को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है।उन्होंने कहा कि जन्म केवल उत्सव नहीं, बल्कि एक उत्तरदायित्व है। जिसने अपने जीवन को साधना, संयम और सेवा से जोड़ लिया, वही वास्तव में सफल होता है।मुनि श्री ने कहा कि आज का मनुष्य बाहरी उपलब्धियों में उलझकर आत्मिक विकास को भूल जाता है, जबकि पंचकल्याणक हमें आत्मपरीक्षण और आत्मसंयम की दिशा में प्रेरित करता है।युवाओं से आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि यदि युवा शक्ति धर्म के मार्ग पर अग्रसर हो जाए, तो समाज का भविष्य उज्ज्वल हो सकता है।
उन्होंने जीवन के चार सत्य भी बताए:
1. जिसने जन्म लिया है, उसकी मृत्यु निश्चित है।
2. हम न कुछ लेकर आते हैं, न कुछ लेकर जाते हैं।
3. जैसा कर्म करेंगे, वैसा फल मिलेगा।
4. वास्तव में केवल ‘मैं’ ही सत्य है, बाकी सब संयोग है।
भगवान का पांडुकशिला पर हुआ कलशाभिषेक
हजारों भक्तों की उपस्थिति में मंत्रोच्चारण और तालियों की गड़गड़ाहट के बीच भगवान जीनेंद्र देव का भव्य कलशाभिषेक किया गया।

