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Home»Uncategorized»गर्भ में ही कन्या की हत्या करना केवल एक निर्दोष जीवन का अंत नहीं, बल्कि स्वयं मानवता की हत्या हैमुनिश्री 108 प्रमाण सागर जी
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गर्भ में ही कन्या की हत्या करना केवल एक निर्दोष जीवन का अंत नहीं, बल्कि स्वयं मानवता की हत्या हैमुनिश्री 108 प्रमाण सागर जी

जस्ट पोस्टBy जस्ट पोस्टApril 2, 2026No Comments3 Mins Read52 Views
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राँची। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत 02 अप्रैल 2026 को आयोजित गर्भ कल्याणक उत्तर रूप के अवसर पर मुनिश्री 108 प्रमाण सागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि “जीवन का वास्तविक उत्थान बाहर से नहीं, भीतर के सम्यक् दर्शन से होता है। जब दृष्टि बदलती है, तभी व्यक्ति का चरित्र और व्यवहार भी बदल जाता है।” उन्होंने बताया कि गर्भ कल्याणक का संदेश मनुष्य को यह स्मरण कराता है कि हर आत्मा में अनंत शक्ति है, बस उसे जागृत करने की आवश्यकता है। मुनिश्री ने कहा कि संसार में भोग-विलास नहीं, बल्कि संयम, सद्चरित्र और आत्म- नियंत्रण ही सच्चा कल्याण देते हैं। मुनिश्री प्रमाण सागर जी ने श्रद्धालुओं को आव्हान किया कि वे पंचकल्याणक महोत्सव को केवल उत्सव न समझें, बल्कि इसे आत्मिक जागरण और सदाचार के संकल्प का अवसर बनाएं। भ्रुण हत्या जैसे कुकृत्य अपराध पर गहरी चिंता व्यक्त की और इसके परिणामों को उदाहरण के द्वारा बताया। कन्या भ्रूण हत्या को आधुनिक समाज का सबसे बड़ा पाप बताते हुए कहा कि कन्या केवल शरीर नहीं, संस्कार और संस्कारक है। जिस समाज में कन्या सुरक्षित नहीं, वह कभी समृद्ध नहीं हो सकता।मुनिश्री ने कहा कि संसार में जन्म लेने वाले हर जीव का अपना अधिकार, धर्म और भविष्य होता है। गर्भ में ही कन्या की हत्या करना केवल एक निर्दोष जीवन का अंत नहीं, बल्कि स्वयं मानवता की हत्या है।“जिस परिवार में कन्या नहीं, उस परिवार में भविष्य नहीं।” मुनिश्री ने माता-पिता से आग्रह किया कि वे पुत्र-पुत्री के भेद से ऊपर उठकर सोचें। उन्होंने कहा कि समय आ गया है जब समाज को यह समझना होगा कि कन्या बोझ नहीं, सौभाग्य है। उन्होंने बताया कि शिक्षा, संस्कृति और नैतिकता ही इस अभिशाप को समाप्त कर सकती है। मुनिश्री ने कन्याओं को सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर देने की अपील करते हुए कहा कि “जहाँ नारी की पूजा होती है, वहीं देवता निवास करते हैं। और जहाँ नारी का अपमान होता है, वहाँ शुभता कभी नहीं ठहरती।” प्रवचन के अंत में मुनिश्री ने सामूहिक संकल्प दिलाते हुए कहा कि प्रत्येक परिवार, प्रत्येक समाज और प्रत्येक संस्था को मिलकर यह प्रण लेना होगा कि गर्भ में पल रहे किसी भी जीवन पर अन्याय नहीं होने देंगे।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएँ उपस्थित रहे अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष ज्योति सिंह मथारू, राजीव रंजन प्रसाद अध्यक्ष गौ सेवा आयोग, संजय पासवान अध्यक्ष झारखंड राज्य आवास बोर्ड, गुणायतन के पदाधिकारीगण उपस्थित थे सभी आगंतुक अतिथियों ने मुनिश्री के समक्ष श्रीफल समर्पित कर आशीर्वाद लिया। जैन समाज के पदाधिकारियों ने सभी का स्वागत व अभिनंदन किया। अपराह्न 2.00 बजे भगवान के माता पिता बने विमल सोगानी एवं सरिता सोगानी के अस्थाई निवास जो उसी प्रांगण मे बनाया गया है वहां माता की गोद भराई की रश्म की गई, संध्या में राजा नाभिराय का दरबार लगा जहां माता मरू देवी ने अपने सपनों का फल जाना

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